टी.एस. सिंहदेव का संगठनात्मक समीक्षा पर जोर, बोले – कांग्रेस में बदलाव की है जरूरत

टी.एस. सिंहदेव का बड़ा बयान: कांग्रेस में प्रदर्शन का हो मूल्यांकन, संगठन में आवश्यक सुधार जरूरी

अहमदाबाद/रायपुर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हालिया बयान का समर्थन करते हुए कांग्रेस संगठन में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि संगठन को बूथ स्तर से लेकर AICC (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) तक के ढांचे का मूल्यांकन करना चाहिए, और जहाँ भी प्रदर्शन में कमी हो, वहां सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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टी.एस. सिंहदेव का यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी देशभर में 2024 के आम चुनावों के बाद संगठनात्मक समीक्षा की प्रक्रिया में है। गुजरात में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि खड़गे ने जो बयान दिया, वह परिस्थिति का आकलन करते हुए एक वरिष्ठ नेता की सूझबूझ और अनुभव के साथ दिया गया बयान था।

“परिस्थिति का आकलन ज़रूरी, बदलाव से ही सुधार संभव”

टी.एस. सिंहदेव ने कहा, “मल्लिकार्जुन खड़गे ने जो कहा, वह एक सच्चाई है। उन्होंने परिस्थिति का विश्लेषण कर एक बहुत ही विनम्र और सौम्य तरीक़े से अपनी बात रखी। पार्टी में हर स्तर पर समीक्षा आवश्यक है — चाहे वह ब्लॉक हो, जिला हो, राज्य या फिर AICC स्तर। यदि प्रदर्शन में कहीं कोई कमी है, तो वहाँ सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संगठनात्मक ढांचे में कितनी मजबूती है और कार्यकर्ताओं की सक्रियता कितनी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पार्टी को सिर्फ व्यक्तियों पर नहीं बल्कि संरचना और काम के तरीके पर भी ध्यान देना होगा।

“खड़गे के बयान का समर्थन, लेकिन आत्ममंथन की भी जरूरत”

मालूम हो कि कुछ दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी नेताओं को नसीहत देते हुए कहा था कि “जो नेता सक्रिय नहीं हैं और पार्टी के लिए काम नहीं कर रहे, उन्हें आराम करना चाहिए।” उनके इस बयान पर जहां कुछ हलकों में आलोचना हुई, वहीं सिंहदेव ने इसे सही और समयानुकूल करार दिया।

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उन्होंने कहा, “एक वरिष्ठ, अनुभवी और बुजुर्ग नेता होने के नाते खड़गे जी ने एक सच्चाई को सामने रखा है। यह बात सौम्यता से रखी गई थी और इसका उद्देश्य आलोचना करना नहीं, बल्कि दिशा दिखाना था।”

वक्फ संशोधन बिल पर जताई असहमति

इसी दौरान सिंहदेव ने वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वक्फ संशोधन अधिनियम को लागू न करने के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि “नियम बनाए जाते हैं लेकिन उन्हें लागू करना राज्य सरकारों पर निर्भर करता है। यह अधिनियम पहले ही पारित हो चुका था, लेकिन इसे लागू करने में समय लगा।”

सिंहदेव ने कहा, “व्यक्तिगत तौर पर, मैं वक्फ बिल में किए गए संशोधनों के स्वरूप से पूरी तरह असहमत हूं। यह एक संवेदनशील विषय है और इसे लागू करने से पहले विस्तृत विमर्श और सभी समुदायों की राय ली जानी चाहिए थी।”

छत्तीसगढ़ में अनुभव और संगठनात्मक समझ से पार्टी को मिल सकती है दिशा

टी.एस. सिंहदेव का छत्तीसगढ़ में एक अनुभवी और सुलझे हुए नेता के तौर पर नाम रहा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक दक्षता और संगठन की समझ का परिचय दिया है। यही वजह है कि उनके बयान को महज़ व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक गंभीर संगठनात्मक सोच के तौर पर देखा जा रहा है।

राज्य की राजनीति पर असर डालने वाले उनके बयानों को राष्ट्रीय फलक पर भी गंभीरता से लिया जाता है। यह बात भी अहम है कि उन्होंने अपने बयान में सीधे तौर पर किसी नेता पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि संरचना और प्रदर्शन की बात करते हुए व्यापक सुधार की जरूरत बताई है।

कांग्रेस के लिए संदेश: संगठन को देना होगा ज़मीन पर उतरने का संदेश

सिंहदेव की बातों का सार यही है कि पार्टी को अब अंदरूनी संगठन पर ध्यान देना होगा। कार्यकर्ताओं की सक्रियता, नेतृत्व की पारदर्शिता और नीतिगत स्पष्टता के बिना पार्टी की स्थिति में सुधार संभव नहीं है। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि जहां-जहां संगठन कमजोर है, वहां बदलाव किए जाने चाहिए।

इससे यह संदेश भी जाता है कि सिंहदेव जैसे नेता संगठन के भीतर लोकतांत्रिक विमर्श की आवश्यकता को समझते हैं और चाहते हैं कि कांग्रेस नए भारत की राजनीति में प्रासंगिक बनी रहे।