श्रावण मास में तुलसी साहित्य समिति की काव्यगोष्ठी | सावन, शिव और शेरो-शायरी का संगम

श्रावण की फुहारों में बही कविता की बयार, ‘तुलसी साहित्य समिति’ की सरस काव्यगोष्ठी में गूंजे शिव, सावन और संवेदना के स्वर

📍 केशरवानी भवन, अंबिकापुर में हुआ आयोजन | शायर-ए-शहर यादव विकास की अध्यक्षता

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अंबिकापुर। सावन की हरियाली, भीगती सड़कों और शिवमय माहौल के बीच तुलसी साहित्य समिति द्वारा वर्षा ऋतु व श्रावण मास पर एक सरस काव्यगोष्ठी का आयोजन केशरवानी भवन में किया गया। शायर-ए-शहर यादव विकास की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और लोकजीवन का सुंदर संगम देखने को मिला।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रह्माशंकर सिंह, विशिष्ट अतिथि कवि जय गुप्ता और उपभोक्ता अधिकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पं. चन्द्रभूषण मिश्र ‘मृगांक’ थे। संचालन कवि जयंत खानवलकर ने किया।

शिवमहिमा और सावन की गंभीरता पर बोलते हुए ब्रह्माशंकर सिंह ने कहा – “महादेव दुखहरण हैं, उनके गुणों से हमें भी जीवन में शांति और संयम की प्रेरणा लेनी चाहिए।” वहीं व्याख्याता सच्चिदानंद पांडेय ने सावन को शिवजी का प्रिय मास बताते हुए उनकी पूजा से जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की बात कही।

काव्य प्रस्तुति के प्रमुख अंश:

  • मुकुंदलाल साहू: “शिव की पूजा हो रही, शिवमय है संसार। शिव-सावन दोनों हुए, मानो एकाकार!”

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  • आशा पांडेय: “हरी फसल को देखकर, मिटे कृषक की पीर!”

  • रूबी सिद्दीकी: “छोटी-छोटी बूंदों से इस जमीं को सजाया जाए!”

  • जय गुप्ता: “रिमझिम बूंदों की बारिश अबके सावन में आई है…”

  • कृष्णकांत पाठक: “प्रेम-बूंद नफरत के शहर में घूम-घूम बरसाता!”

  • अर्चना पाठक: “काले-काले मेघ घने, नेह का संदेश लाए…”

  • जयंत खानवलकर: “हरे रंग की चुनरी ओढ़कर बरखा रानी आई है!”

लोकगीतों और सरगुजिहा की खुशबू भी मंच पर महकी जब प्रकाश कश्यप, देवेन्द्रनाथ दुबे, और रामलाल विश्वकर्मा जैसे कवियों ने क्षेत्रीय भावों को शब्दों में ढाला।

कवि अजय सागर की पंक्तियाँ “सड़कों पर पानी बहुत, गड्ढे हैं विकराल…” श्रोताओं के लिए सावधानी का संदेश भी बन गईं। समापन शायर यादव विकास की ग़ज़ल से हुआ, जिसने मंच की गरिमा को और ऊंचा कर दिया।

आभार ज्ञापन कवयित्री आशा पांडेय ने किया। इस अवसर पर केके त्रिपाठी, लीला यादव, सुब्रत मिश्रा, अनिल त्रिपाठी और मनीलाल गुप्ता भी उपस्थित रहे।