
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: आस्था, आत्मगौरव और भारत की अमर चेतना का प्रतीक — पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को भारत की हजारों वर्षों की आस्था, साधना और आत्मगौरव का प्रतीक बताया। जानिए इस ऐतिहासिक आयोजन का महत्व।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: आस्था, आत्मगौरव और भारत की अमर चेतना का प्रतीक — पीएम मोदी
सोमनाथ (गुजरात):प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पवित्र श्री सोमनाथ मंदिर में आयोजित “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” को भारत की हजारों वर्षों पुरानी आस्था, साधना और अटूट संकल्प का जीवंत प्रतीक बताया। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि यह भारत की सभ्यता, संस्कृति और आत्मबल का शाश्वत प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपने संदेश में लिखा कि “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व करोड़ों-करोड़ भारतीयों की शाश्वत आस्था, साधना और अटूट संकल्प का जीवंत प्रतिबिंब है। पवित्र श्री सोमनाथ मंदिर में इस महापर्व का सहभागी बनना मेरे जीवन का अविस्मरणीय और अमूल्य क्षण है।”
हजार साल बाद भी शान से लहरा रहा ध्वज
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO India) ने इस अवसर पर कहा कि हजार वर्षों के संघर्षों के बाद भी सोमनाथ मंदिर पर ध्वज आज भी शान से लहरा रहा है, जो भारत की अडिग आत्मा और अदम्य साहस का प्रतीक है।
PMO के अनुसार, “Even after a thousand years, the flag still flies atop the Somnath Temple. It reminds the world of India’s strength and spirit.”
यह संदेश स्पष्ट करता है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत कितनी मजबूत और अमर है।
अस्तित्व और आत्मगौरव का उत्सव
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को भारत के अस्तित्व और आत्मगौरव के उत्सव के रूप में परिभाषित करते हुए PMO India ने कहा कि यह पर्व हजार वर्षों की यात्रा का प्रतीक है, जिसमें भारत ने हर चुनौती के बावजूद अपनी पहचान को बनाए रखा।
“#SomnathSwabhimanParv marks a journey of a thousand years. It stands as a celebration of India’s existence and self-pride.”
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज अपनी सांस्कृतिक विरासत को केवल याद नहीं कर रहा, बल्कि उसे गर्व के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा है।
विनाश नहीं, विजय और पुनर्निर्माण की कहानी
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ के इतिहास को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि यह इतिहास विनाश या पराजय का नहीं, बल्कि विजय, पुनर्निर्माण और नवचेतना का इतिहास है।
उन्होंने कहा, “The history of Somnath is not one of destruction or defeat. It is a history of victory and renewal.”
यह कथन उन ऐतिहासिक घटनाओं की ओर संकेत करता है, जहां सोमनाथ मंदिर को बार-बार ध्वस्त किया गया, लेकिन हर बार वह पहले से अधिक भव्य रूप में पुनर्निर्मित हुआ।
इतिहास में सिमट गए विध्वंसक, आज भी अडिग सोमनाथ
प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने संदेश में कहा कि जो लोग सोमनाथ को नष्ट करने के इरादे से आए थे, वे आज इतिहास के कुछ पन्नों तक सीमित होकर रह गए हैं, जबकि सोमनाथ मंदिर आज भी अरब सागर के तट पर गर्व के साथ खड़ा है।
“Those who came with the intent to destroy Somnath have today been reduced to a few pages of history.”
PMO ने आगे कहा कि सोमनाथ का ऊंचा ध्वज आज भी विश्वास और आस्था के साथ लहरा रहा है।
समुद्र के किनारे खड़ा अडिग आस्था का स्तंभ
अरब सागर के तट पर स्थित सोमनाथ मंदिर न केवल वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि यह भारतीय सभ्यता की अविचल आत्मा का भी प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ यह दिखाता है कि सृजन में समय लगता है, लेकिन वही सदा टिकता है।
“Somnath shows that while creation takes time, it alone endures.”
यह संदेश भारत के निर्माण, धैर्य और दीर्घकालिक सोच की ओर इशारा करता है।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण का केंद्र
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पर्व बताते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन भारत की नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है। यह पर्व न केवल धार्मिक है, बल्कि इसमें राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक आत्मविश्वास की झलक भी दिखाई देती है।
वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक पहचान
प्रधानमंत्री मोदी के इन संदेशों को वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। आज भारत न केवल आर्थिक और सामरिक रूप से, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी विश्व को नेतृत्व दे रहा है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व इस बात का प्रतीक है कि भारत अपने अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ बढ़ रहा है।








