अमलीपदर: अधूरी पुलिया से फिर बड़ा हादसा, बाइक सवार नदी में बहा – 7.40 करोड़ खर्च के बाद भी काम अधूरा

अमलीपदर: अधूरी पुलिया से फिर बड़ा हादसा, बाइक सवार नदी में बहा – 7.40 करोड़ खर्च के बाद भी काम अधूरा

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गरियाबंद के अमलीपदर में सुखा तेल नदी पर अधूरी पुलिया से हादसे जारी। ग्रामीणों ने साहस दिखाकर युवक की जान बचाई, लेकिन 4 साल से वादों के बावजूद निर्माण अधूरा।

गरियाबंद। मैनपुर विकासखंड के अमलीपदर में सुखा तेल नदी पर अधूरी पड़ी पुलिया एक बार फिर हादसे की वजह बन गई। तेज बहाव में बाइक सवार युवक बह गया, हालांकि ग्रामीणों ने मानव श्रृंखला और रस्सी के सहारे उसकी जान बचा ली। बाइक, मोबाइल और नकदी पानी में बह गई।

यह कोई पहला मामला नहीं है। चार साल पहले 7 करोड़ 40 लाख रुपये की स्वीकृति मिलने के बावजूद आज तक पुलिया तैयार नहीं हो सकी। एमजी एसोसिएट्स नामक कंपनी को काम मिला, लेकिन चार साल में एक पिलर भी नहीं बना। जब ग्रामीणों ने आवाज उठाई तो कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया। इसके बाद भी विभाग और सरकार ने सिर्फ आश्वासन दिया—“बारिश के बाद काम शुरू होगा”।

ग्रामीणों की जान रोज खतरे में

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अमलीपदर-धुरुवागुड़ी मार्ग, जिसे ग्रामीण ‘लाइफलाइन’ कहते हैं, बरसात में मौत का रास्ता बन जाता है। मासूम बच्चों को गोद में लेकर नदी पार कराना पड़ता है। तीन साल पहले एक ग्रामीण की नदी में डूबकर मौत हो चुकी है। हाल ही में एक सप्ताह पहले बारिश में जर्जर रपटा पर बहाव बढ़ने से पूर्णचंद्र साहू की बाइक, मोबाइल और 12 हजार रुपये बह गए।

चार साल से केवल झूठे वादे

पुलिया का काम डेढ़ साल में पूरा करने का दावा किया गया था, लेकिन चार साल में नतीजा शून्य है। धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल, चक्का जाम सब हो चुका है। एसडीएम से लेकर कलेक्टर और मंत्रियों तक आवेदन दिए गए, फिर भी केवल टालमटोल जवाब मिला।

सरकार पर बड़े सवाल

7.40 करोड़ रुपये कहां गए?

चार साल में काम क्यों नहीं हुआ?

क्या अमलीपदर की जिंदगी सिर्फ चुनावी वादों तक सिमट गई है?

एसडीएम का दावा

मैनपुर एसडीएम तुलसीदास मरकाम ने कहा—“टेंडर प्रक्रिया चल रही है, आने वाले वर्ष तक पुल निर्माण हो जाएगा।”

अमलीपदर की जनता पूछ रही है—क्या यह पुलिया कभी बनेगी, या फिर हर बार की तरह ‘बारिश के बाद काम शुरू होगा’ का बहाना ही मिलेगा?