शासकीय पट्टाधारी किसानों की धान खरीदी में बड़ी समस्या: ऑनलाइन पंजीयन न होने से संकट, समिति ने कलेक्टर व मंत्री को सौंपा ज्ञापन

शासकीय पट्टाधारी किसानों की धान खरीदी में बड़ी समस्या: ऑनलाइन पंजीयन न होने से संकट, समिति ने कलेक्टर व मंत्री को सौंपा ज्ञापन

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बलरामपुर/रामानुजगंज, 28 अगस्त 2025। जिला बलरामपुर-रामानुजगंज में शासकीय पट्टाधारी किसानों के सामने इस बार खरीफ सीजन में बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। धान खरीदी के लिए आवश्यक ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया में उनका नाम दर्ज नहीं होने के कारण ये किसान शासकीय धान मण्डियों में अपना धान बेचने से वंचित हो रहे हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ बंग समाज कल्याण समिति ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।

क्या है मामला?

जिले में बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं जिनके पास शासकीय पट्टे पर भूमि है। कई वर्षों से ये किसान गिरदावरी के आधार पर शासकीय धान मण्डियों में धान विक्रय करते रहे हैं। लेकिन इस बार ऑनलाइन सिस्टम के चलते उनकी समस्याएं बढ़ गई हैं। ऑनलाइन पंजीयन नहीं होने के कारण गिरदावरी प्रक्रिया में भी उनका नाम दर्ज नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप, वे धान विक्रय के लिए पात्र नहीं हो रहे।

किसानों का कहना है कि वे धान की बुवाई कर चुके हैं और फसल तैयार हो रही है, लेकिन यदि ऑनलाइन पंजीयन नहीं हुआ तो उनकी उपज को मंडी में बेच पाना संभव नहीं होगा। इससे न सिर्फ किसानों को आर्थिक नुकसान होगा बल्कि धान की अवैध खरीदी-बिक्री और बिचौलियों के सक्रिय होने का खतरा भी बढ़ेगा।

क्यों हो रही है दिक्कत?

छत्तीसगढ़ सरकार की धान खरीदी नीति के तहत सभी किसानों का ऑनलाइन पंजीयन अनिवार्य किया गया है। यह प्रक्रिया ई-गिरदावरी के साथ जुड़ी है। ऐसे में जिन किसानों की जमीन शासकीय पट्टे पर है, उनकी ऑनलाइन एंट्री नहीं हो रही।

छत्तीसगढ़ बंग समाज कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने बताया,

“कई किसानों के पास वर्षों से शासकीय पट्टा है। वे हर साल गिरदावरी के आधार पर धान बेचते आए हैं, लेकिन इस बार ऑनलाइन सिस्टम में उनका नाम दर्ज न होने से गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।”

समिति ने उठाई आवाज, सौंपा ज्ञापन

इस मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ बंग समाज कल्याण समिति ने दो ज्ञापन सौंपे हैं—

एक जिला कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज को

दूसरा कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम को

ज्ञापन में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि यदि शासकीय पट्टाधारी किसानों का ऑनलाइन पंजीयन नहीं हुआ तो वे शासकीय धान मण्डियों में धान नहीं बेच पाएंगे, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी।

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समिति के अध्यक्ष रॉबिन बिस्वास ने कहा:

“हमारी मांग है कि सभी शासकीय पट्टाधारी किसानों का ऑनलाइन पंजीयन कर गिरदावरी प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि वे धान खरीदी योजना का लाभ उठा सकें। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो किसान आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।”

किसानों की परेशानियां और खतरे

किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने में कुछ ही महीने बाकी हैं। यदि समाधान नहीं हुआ तो—

वे धान को समर्थन मूल्य पर बेचने से वंचित रह जाएंगे

खुले बाजार या बिचौलियों को कम कीमत पर बेचने को मजबूर होंगे

राज्य सरकार की धान खरीदी योजना पर भी सवाल उठेंगे

किसानों ने यह भी कहा कि कई बार उन्होंने ऑनलाइन प्रक्रिया को समझने और दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन सिस्टम में उनकी जानकारी स्वीकार नहीं हो रही।

प्रशासन से क्या है उम्मीद?

किसानों और समिति की मांग है कि—

विशेष अभियान चलाकर शासकीय पट्टाधारी किसानों का पंजीयन किया जाए

गिरदावरी में उनके नाम जोड़े जाएं

धान खरीदी केंद्रों पर लचीली नीति अपनाई जाए, ताकि पात्र किसान वंचित न हों

ज्ञापन पर हस्ताक्षर और समर्थन

ज्ञापन पर समिति के कई पदाधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं। इनमें जिला उपाध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष, महिला समिति की सदस्याएं और अन्य किसान शामिल हैं। उन्होंने प्रशासन से तुरंत सकारात्मक कार्रवाई करने की अपील की है।

सरकार की धान खरीदी नीति का बैकग्राउंड

छत्तीसगढ़ सरकार हर साल धान की खरीदी के लिए ऑनलाइन पंजीयन और ई-गिरदावरी अनिवार्य करती है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता के लिए शुरू की गई थी, ताकि फर्जी विक्रय रोका जा सके। लेकिन इस बार शासकीय पट्टाधारी किसानों के लिए यह शर्त बड़ी बाधा बन गई है।

आगे क्या?

अब सवाल यह है कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस समस्या का समाधान कितनी जल्दी कर पाती है। क्योंकि यदि ऑनलाइन पंजीयन का समाधान समय रहते नहीं किया गया, तो खरीफ सीजन में किसानों का गुस्सा सड़क पर उतर सकता है।

बलरामपुर-रामानुजगंज में शासकीय पट्टाधारी किसानों का ऑनलाइन पंजीयन नहीं होने से धान खरीदी में बाधा। समिति ने कलेक्टर और मंत्री को ज्ञापन सौंपा। प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग।