
रूस से तेल खरीद: ट्रंप के दावे पर शशि थरूर का पलटवार, कहा- भारत के फैसले की घोषणा आप न करें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे (भारत साल के अंत तक रूस से तेल आयात कम करेगा) पर विवाद। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि भारत अपनी ऊर्जा नीति और फैसले खुद करेगा। भारत ने स्थिर आपूर्ति को बताया प्राथमिकता।
रूस से तेल आयात पर ट्रंप के दावे पर विवाद: शशि थरूर ने कहा- भारत के फैसलों की घोषणा ट्रंप न करें
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर भारत में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत साल के अंत तक रूस से तेल आयात को लगभग पूरी तरह से समाप्त कर देगा। ट्रंप ने यह दावा 22 अक्टूबर को किया था, और कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ऐसा आश्वासन दिया है।
ट्रंप ने कहा था, “जैसा कि आप जानते हैं, भारत ने मुझसे कहा था कि वे इसे रोक देंगे। यह एक प्रक्रिया है। आप इसे यूं ही नहीं रोक सकते। इस साल के अंत तक उनके पास लगभग शून्य मात्रा में तेल रह जाएगा। यह बहुत बड़ी बात है, क्योंकि यह लगभग 40 प्रतिशत तेल है। प्रधानमंत्री मोदी से बात की और ये बिल्कुल शानदार रही।”
ट्रंप का यह बयान अमेरिका द्वारा दो प्रमुख रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने के बाद आया था।
शशि थरूर ने की कड़ी आलोचना
ट्रंप के इस दावे पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कड़ी आलोचना करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति को जवाब दिया है। थरूर ने कहा कि ट्रंप को यह ‘ज्ञान’ देने की जरूरत नहीं है कि भारत को क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
शशि थरूर ने टिप्पणी की:
“मुझे नहीं लगता कि ट्रंप का भारत के फैसलों की घोषणा करना उचित है। मुझे लगता है कि भारत खुद अपने फैसलों की घोषणा करेगा। हम दुनिया को यह नहीं बताते कि ट्रंप क्या करेंगे। मुझे लगता है कि ट्रंप को दुनिया को यह नहीं बताना चाहिए कि भारत क्या करेगा।”
ट्रंप के इस दावे से पहले, ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगाने और नई दिल्ली से अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने का आह्वान किया था, जिसमें उन्होंने देश द्वारा रूसी तेल की निरंतर खरीद की आलोचना की थी।
हालांकि, भारत ने लगातार ऐसे किसी भी समझौते से इनकार किया है, और इस बात पर जोर दिया है कि उसकी ऊर्जा नीति उपभोक्ताओं के लिए स्थिर कीमतों और सुरक्षित आपूर्ति को प्राथमिकता देती है। भारत का आधिकारिक रुख यही रहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हित के अनुसार ऊर्जा खरीद के फैसले खुद करेगा।











