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सरगुजा में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की जयंती मनाई गई | साहित्यकारों ने याद किया आधुनिक हिन्दी का जनक

सरगुजा में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की जयंती पर हुआ विशेष आयोजन

साहित्यकारों ने उन्हें आधुनिक हिन्दी साहित्य का जनक बताया

अम्बिकापुर। भारतीय साहित्य एवं कला समिति, सरगुजा द्वारा 9 सितम्बर को स्थानीय भारतेन्दु भवन में हिन्दी साहित्य के पुरोधा भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में साहित्यकारों, अध्यापकों और छात्रों ने उनकी साहित्यिक और सामाजिक उपलब्धियों को याद किया।

भारतेन्दु का योगदान

मुख्य अतिथि डॉ. राजकुमार मिश्र और विशिष्ट अतिथि डॉ. सुधामा मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने हिन्दी साहित्य को आधुनिक स्वरूप दिया और भारतीय नवजागरण के अग्रदूत के रूप में कार्य किया।
अध्यक्षीय संबोधन देते हुए डॉ. मुकुला सिंह ने कहा कि भारतेन्दु के नाटक ‘अंधेर नगरी’, ‘भारत दुर्दशा’ और ‘सत्य हरिश्चन्द्र’ आज भी समाज और व्यवस्था पर गहरी चोट करते हैं।

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जीवन परिचय

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का जन्म 9 सितम्बर 1850 को काशी में हुआ था। मात्र 35 वर्ष की आयु में 6 जनवरी 1885 को उनका निधन हो गया। अल्पायु में ही उन्होंने नाटक, निबंध, कविताओं और लेखन के माध्यम से हिन्दी साहित्य को नई दिशा दी।

विविध कार्यक्रमों की प्रस्तुति

कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा काव्य पाठ, नाट्य प्रस्तुति और गीतों का वाचन किया गया। मंच संचालन अशोक कुमार मिश्रा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुधामा मिश्र ने दिया।
समिति के अध्यक्ष सुधाकर मिश्र ने बताया कि समिति आगे भी इस तरह के साहित्यिक आयोजन करती रहेगी।

कार्यक्रम में शामिल रहे

इस अवसर पर सुशील पाठक, राजेन्द्र तिवारी, राजेन्द्र शर्मा, अजय शुक्ला, सतीश श्रीवास्तव, के.पी. सिंह, सुनील मिश्रा, रंजीत साहू सहित अनेक साहित्यकार और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

 

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