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वक्फ बोर्ड के आदेश पर गरमाई सियासत; बीजेपी कांग्रेस में छिड़ा विवाद..जानें पूरा मामला

रायपुर। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने बीते दिनों प्रदेश के मुस्लिम समुदाय के युवाओं को हिन्दुओं के पर्व नवरात्री में आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रमों में शामिल न होने की अपील की थी, जिससे प्रदेश में कोई जातिगत विवाद या हिंसा की स्थिति न बने, लेकिन अब इस मामले को लेकर प्रदेश में राजनीति जरुर गरमाई हुई है। जहां एक तरफ कांग्रेस ने वक्फ बोर्ड को बीजेपी का टूलकिट बताया है, वहीं भाजपा ने भी कांग्रेस के आरोपों का खंडन करते हुए उसपर करारा पलटवार किया है।

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जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज ने कहा था कि, मुस्लिम युवा किसी भी नवरात्रि में आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रमों में न जाए। उन्होंने कहा कि, गरबा सिर्फ एक डांस नहीं है, बल्कि यह देवी दुर्गा की पूजा का एक हिस्सा है। यह जीवन के चक्र और देवी की शक्ति को दिखाता है। उन्होंने कहा कि, अगर मुस्लिम लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करते, तो उन्हें ऐसे धार्मिक आयोजनों से दूर रहना चाहिए।

कांग्रेस का वार: “वक्फ बोर्ड, बीजेपी का टूलकिट”

वक्फ बोर्ड की इस अपील के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने वक्फ बोर्ड पर हमला बोलते हुए कहा कि, यह तो बीजेपी के टूलकिट की तरह काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि न तो कभी हिंदुओं को मस्जिद में नमाज़ पढ़ते देखा गया है और न ही मुसलमानों को गरबा करते। शुक्ला ने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए ऐसा कर रहा है।

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बीजेपी का पलटवार: “गरबा में आएं, लेकिन आस्था के साथ”

कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए बीजेपी ने भी पलटवार किया। भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष की बात का समर्थन किया और कहा कि गरबा एक धार्मिक आस्था है, जिसका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गरबा में सभी लोग आ सकते हैं, लेकिन उन्हें देवी माता के प्रति आस्था के साथ आना चाहिए।

गरबा के मुद्दे के अलावा रायपुर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष के विवाद पर भी दोनों पार्टियों के बीच जुबानी जंग देखने को मिली। कांग्रेस के सुशील आनंद शुक्ला ने नगर निगम के सभापति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें इस मामले में अभिमत देने का कोई अधिकार नहीं है और यह बीजेपी की घटिया राजनीति का हिस्सा है।

वहीं, बीजेपी विधायक पुरंदर मिश्रा ने इस विवाद पर कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि, जो लोग बागी तेवर दिखा रहे हैं, वे बीजेपी में आ जाएं। उन्होंने कांग्रेस को ‘परिवार की पार्टी’ बताते हुए तंज कसा कि यही वजह है कि जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत पर सवाल

पुरंदर मिश्रा ने कांग्रेस में जिला अध्यक्षों के चयन को लेकर भी निशाना साधा और कहा कि, कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष की कोई हैसियत नहीं है और राहुल गांधी ही सब कुछ तय करते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि, कांग्रेस ‘आलू से सोना’ बनाने की सोच रखती है, जबकि बीजेपी में हर किसी का समायोजन करके पद दिया जाता है।

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