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छत्तीसगढ़ में धान विक्रय के लिए एग्रीस्टैक पंजीकरण अनिवार्य, अब तक 24 लाख किसान जुड़े

किसानों को धान विक्रय के लिए एग्रीस्टैक पंजीयन कराना अनिवार्य

छत्तीसगढ़ में पोर्टल से जुड़ रहे हैं लाखों किसान | खेती में डिजिटल क्रांति की दिशा में बड़ा कदम

अम्बिकापुर, 06 अक्टूबर 2025। छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के जीवन में तकनीकी बदलाव लाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में राज्य में अब एग्रीस्टैक पोर्टल को तेजी से लागू किया जा रहा है। यह पोर्टल किसानों के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक संरचना है, जो खेती से जुड़ी सभी प्रमुख जानकारियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है।


क्या है एग्रीस्टैक पोर्टल?

एग्रीस्टैक एक सुरक्षित डिजिटल प्रणाली (Secure Digital System) है, जिसमें किसान की पहचान, जमीन का रिकॉर्ड, फसल की जानकारी और कृषि संबंधी गतिविधियों का पूरा डेटा एकीकृत रूप से दर्ज किया जाता है। इस जानकारी का उपयोग किसान की सहमति से ही साझा किया जाता है, जिससे उनकी निजी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है।


धान विक्रय के लिए अनिवार्य पंजीयन

इस वर्ष सहकारी समितियों के माध्यम से धान विक्रय करने वाले किसानों के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने, डेटा आधारित निर्णय लेने और किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके खाते तक पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।


किसानों को मिल रहे सीधे लाभ

एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से किसानों को अब योजनाओं, सब्सिडियों और सहायता राशि की जानकारी सीधे मिल रही है। इससे

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  • बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी,

  • भुगतान प्रक्रिया तेज होगी,

  • और लाभ वितरण में पारदर्शिता आएगी।


पंजीकरण की प्रक्रिया सरल और निशुल्क

किसानों को केवल आधार कार्ड और ऋण पुस्तिका के साथ नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या अपनी सहकारी समिति में जाकर नि:शुल्क पंजीकरण कराना होगा।
पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है और किसानों को डिजिटल पहचान (Digital ID) प्रदान की जाती है।


24 लाख से अधिक किसान जुड़ चुके हैं

राज्यभर में अब तक 24 लाख से अधिक किसानों ने एग्रीस्टैक पोर्टल से जुड़कर डिजिटल कृषि सेवाओं का लाभ उठाना शुरू कर दिया है।
सरकार का लक्ष्य है कि आगामी रबी सत्र तक सभी पात्र किसान इस प्लेटफॉर्म से जुड़ जाएं, जिससे राज्य में खेती को पूरी तरह डेटा आधारित और तकनीकी रूप से उन्नत बनाया जा सके।


“डिजिटल खेती, समृद्ध किसान”

एग्रीस्टैक पोर्टल भविष्य में राज्य की सभी कृषि योजनाओं की रीढ़ साबित होगा। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि खेती को वैज्ञानिक, योजनाबद्ध और सतत (Sustainable) बनाने में भी मदद मिलेगी।


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