बटेश्वर मेले में उटंगन नदी पर जल संरक्षण सम्मेलन की पहल, ग्रामीण पत्रकार करेंगे नेतृत्व

बटेश्वर मेले के अवसर पर उटंगन केन्द्रित जल संरक्षण सम्मेलन के लिये ग्रामीण पत्रकार करेंगे पहल

अरनौटा, पिढौरा का भ्रमण, बटेश्वर में आयोजन पर विमर्श

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आगरा, 07 अक्टूबर 2025।
बटेश्वर मेले के अवसर पर जनपद के ग्रामीण पत्रकार उटंगन नदी केन्द्रित जल संरक्षण सम्मेलन का आयोजन करने जा रहे हैं। यह पहल उत्तर प्रदेश ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की जनपद इकाई द्वारा सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा के सहयोग से की जा रही है। आयोजन का उद्देश्य जनपद की नदियों और जल स्रोतों के संरक्षण तथा भूजल रिचार्ज की दिशा में ठोस जनजागरण पैदा करना है।

एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शंकर देव तिवारी ने बताया कि इस आयोजन को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया से संपर्क किया जाएगा। तिवारी ने कहा कि “उटंगन नदी जनपद का प्रमुख जल स्रोत है। इसका संरक्षण न केवल भूजल स्तर सुधार में सहायक होगा, बल्कि ‘हर घर नल, हर घर जल’ जैसी योजनाओं को साकार करने में भी मदद करेगा।”

अरनौटा-पिढौरा का भ्रमण

ग्रामीण पत्रकारों की टीम ने सोमवार को अरनौठा और पिढौरा गांवों का दौरा किया, जहां मानसून के बाद भी नदी में पर्याप्त जल प्रवाह देखा गया। इस दौरान सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा के सचिव अनिल शर्मा, असलम सलीमी और राजीव सक्सेना भी मौजूद रहे।
बटेश्वर में बाह क्षेत्र के पत्रकारों के साथ हुई चर्चा में श्री तिवारी ने कहा कि “ग्रामीण पत्रकारों के सामने जल संकट और सिंचाई संसाधनों की रिपोर्टिंग हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। अब इसे जनभागीदारी से हल करने का प्रयास होना चाहिए।”

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ग्रामीण पत्रकारों की सहभागिता

आयोजन की प्रारंभिक चर्चा में अलख दुबे, रणवीर सिंह, राज यादव, अजय भदौरिया, असलम सलीमी, मुकेश शर्मा सहित कई पत्रकारों ने भाग लिया। सभी ने बटेश्वर मंदिर परिसर में सम्मेलन आयोजित करने के विचार का समर्थन किया।

उटंगन नदी पर रेहावली बांध की आवश्यकता

सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा के सचिव अनिल शर्मा ने बताया कि डॉ. मंजू भदौरिया के कार्यकाल में उटंगन नदी पर रेहावली गांव में बांध निर्माण की पहल से क्षेत्र को नई पहचान मिली है।
राजीव सक्सेना ने कहा कि बांध बनने से आगरा, फतेहाबाद, बाह, किरावली और खेरागढ़ क्षेत्र में जल संकट दूर होगा और खराब पड़े हैंडपंप पुनः चालू हो सकेंगे।

केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, रेहावली बांध बनने से भूमिगत जलस्तर बढ़ेगा, पेयजल की गुणवत्ता सुधरेगी और सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा।

भूगर्भ जल रिचार्ज का प्रमुख स्रोत

बांध निर्माण से शमसाबाद, फतेहाबाद, पिनाहट और बाह ब्लॉकों में भूजल स्तर और गुणवत्ता दोनों में सुधार की संभावना है। वर्तमान में ये सभी क्षेत्र अति-दोहित श्रेणी में आते हैं, जहां जल स्तर लगातार गिर रहा है।