अमेरिकी सांसदों ने H-1B वीज़ा शुल्क वृद्धि का किया विरोध, भारत-अमेरिका साझेदारी पर खतरे की आशंका

अमेरिकी सांसदों ने H-1B वीज़ा शुल्क वृद्धि का किया विरोध, भारत-अमेरिका साझेदारी पर असर की जताई आशंका

वॉशिंगटन डीसी:अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हाल ही में जारी किए गए H-1B वीज़ा से जुड़े नए नियमों और शुल्क वृद्धि के फैसले को वापस लेने की अपील की है। सांसदों का कहना है कि वीज़ा आवेदन पर लगभग 1 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 83 लाख रुपये) की अतिरिक्त फीस और अन्य प्रतिबंधों से न केवल अमेरिकी टेक उद्योग पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, बल्कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को भी नुकसान पहुंचेगा।

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सांसदों ने जताई कड़ी आपत्ति

19 सितंबर को जारी इस आदेश के खिलाफ कांग्रेस सदस्य जिमी पनेटा, अमी बेरा, सालुद कार्बाजल और जूली जॉनसन ने ट्रंप को पत्र लिखकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस नीति से भारतीय तकनीकी पेशेवरों पर सबसे अधिक असर पड़ेगा, जो लंबे समय से अमेरिका की नवाचार और आर्थिक वृद्धि में योगदान दे रहे हैं।

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सांसदों ने लिखा —

“हम आपसे अनुरोध करते हैं कि 19 सितंबर की घोषणा को स्थगित करें और ऐसी किसी भी नीति पर पुनर्विचार करें जो H-1B कार्यक्रम तक उचित पहुंच को सीमित करती हो। यह कार्यक्रम अमेरिकी अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत के साथ हमारे मजबूत संबंधों के लिए आवश्यक है।”

भारत के लिए रणनीतिक महत्व

सांसदों के अनुसार, H-1B कार्यक्रम विशेष रूप से STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों में अमेरिका की प्रतिस्पर्धा बनाए रखने की रीढ़ है।
उन्होंने कहा कि जब चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रहा है, तब अमेरिका को वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि —

“भारत के मामले में, जो पिछले साल 71 प्रतिशत H-1B वीज़ाधारकों का मूल देश था, इस प्रतिभा को आकर्षित करना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख लोकतांत्रिक साझेदार के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करता है।”