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कर्नाटक में सियासी संकट: विधायकों का दावा—डीके शिवकुमार जल्द बनेंगे CM!

Karnataka Politics Crisis: कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज, विधायक बोले—‘डीके शिवकुमार बहुत जल्द बनेंगे CM’

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही सियासी खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच ‘सीएम की कुर्सी’ को लेकर जारी अंदरूनी तनाव अब खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस के कई विधायक खुलकर शिवकुमार के समर्थन में बयान दे रहे हैं, जिससे राज्य की राजनीति में उथल-पुथल तेज हो गई है।


आलाकमान से मुलाकात के बाद राजनीतिक हलचल तेज

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने हाल ही में बेंगलुरु में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने साफ कहा कि—

  • चर्चा संगठनात्मक मुद्दों, स्थानीय निकाय चुनावों और आगामी जिला-तालुक पंचायत चुनावों पर थी
  • नेतृत्व परिवर्तन की खबरें ‘‘सिर्फ अटकलें’’ हैं
  • “हाईकमान जो भी निर्णय लेगा, मैं उसका पालन करूंगा”

लेकिन उनके इस बयान के बावजूद पार्टी के अंदर का दबाव खत्म नहीं हुआ है।


विधायक बोले—‘डीके शिवकुमार जल्द ही बनेंगे मुख्यमंत्री’

रामनगर के कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने बड़ा दावा करते हुए कहा—

  • “मुझे 200 प्रतिशत भरोसा है कि डीके शिवकुमार जल्द ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनेंगे।
  • “कुछ विधायकों ने दिल्ली में आलाकमान से मिलकर इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है।”
  • “हर कोई हाईकमान के फैसले को मानेगा, लेकिन सत्ता का ट्रांसफर जल्द होगा।”

इसके अलावा मद्दूर के कांग्रेस विधायक केएम उदय ने भी कहा कि—

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  • कैबिनेट विस्तार में नए चेहरों और युवाओं को शामिल करने की मांग हाईकमान से की गई है
  • इस पर सकारात्मक संकेत मिले हैं

एक और विधायक ने दावा किया कि सत्ता परिवर्तन “पाँच–छह टॉप नेताओं के बीच हुई एक सीक्रेट डील” पर आधारित है।


सिद्धारमैया की कुर्सी पर बढ़ा दबाव

इन दावों ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उनका आधा कार्यकाल पूरा हो चुका है और अब शासन के दूसरे चरण में बदलाव की अटकलें जोरों पर हैं। कांग्रेस विधायकों का एक वर्ग स्पष्ट रूप से शिवकुमार को सीएम बनाने के पक्ष में दिखाई दे रहा है।


क्या है असल वजह?

  • 2023 चुनाव से पहले सत्ता साझेदारी को लेकर सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच अनौपचारिक समझौते की चर्चाएँ
  • प्रदेश संगठन पर बढ़ता गुटबाज़ी का दबाव
  • कई फैसलों पर दोनों नेताओं के बीच असहमति
  • स्थानीय निकाय और आगामी पंचायत चुनावों में प्रदर्शन की चिंता

कांग्रेस का संकट गहराता हुआ

कर्नाटक कांग्रेस में यह शक्ति संघर्ष अब खुलकर सामने आ चुका है।
जहाँ सिद्धारमैया स्थिर नेतृत्व की बात कर रहे हैं, वहीं शिवकुमार का गुट दावा कर रहा है कि “सत्ता का ट्रांसफर तय है और जल्द होगा।”

राज्य की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर में है और अब सबकी निगाहें कांग्रेस आलाकमान पर टिकी हैं—क्या वे नेतृत्व परिवर्तन का बड़ा फैसला लेते हैं या सिद्धारमैया को पूरे कार्यकाल तक बनाए रखते हैं?

 

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