जेम पोर्टल खरीदी में संगठित भ्रष्टाचार का आरोप: विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में बिना निविदा करोड़ों की खरीद, जांच समिति गठित

जेम पोर्टल खरीदी में संगठित भ्रष्टाचार का आरोप: विश्वविद्यालयों व कॉलेजों पर बिना निविदा करोड़ों के ऑर्डर बांटने का आरोप, जांच समिति गठित

रायपुर। प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के अधीन आने वाली कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों द्वारा जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से सामग्रियों की खरीदी में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोपों के अनुसार, बिना निविदा जारी किए L1 पद्धति का दुरुपयोग कर फर्नीचर, खेल सामग्री, कंप्यूटर, प्रिंटर, टीवी, AC, इंटरैक्टिव पैनल, गद्दा, कारपेट, टाइल्स, माइक्रोफोन, बेडशीट, सोलर वाटर कूलर आदि की करोड़ों की खरीदी सिर्फ एक या दो ही फर्मों से कर ली गई।

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कई संस्थानों ने एक ही दिन में दिए कई करोड़ों के ऑर्डर

शिकायत के अनुसार—

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अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी, बिलासपुर

  • 15.04.2025 को बिना निविदा L1 पद्धति से 1 करोड़ से अधिक की खरीदी
  • तीन फर्मों—सागर इंडस्ट्रीज, सिंघानिया ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज और ओशन एंटरप्राइज (सभी जांजगीर)—को एक ही दिन में 26 क्रय आदेश
  • संदेह: ये तीनों फर्में एक ही परिवार से संबंधित होने की संभावना

गवर्नमेंट कॉलेज, महासमुंद

  • 22.10.2025 को 1 करोड़ की कीमत के 36 अलग-अलग क्रय आदेश
  • वह भी इन्हीं फर्मों को, बिना निविदा

वीरांगना रमोतीन गवर्नमेंट मॉडल कॉलेज, नारायणपुर

  • 14.10.2025 को 35 लाख के 22 क्रय आदेश, एक ही दिन में
  • पूरी खरीदी सिर्फ निर्दिष्ट फर्मों के माध्यम से

सवाल उठे:

  • सभी सामग्रियों की खरीदी एक ही फर्म या संबंधित फर्मों से कैसे?
  • जेम पोर्टल पर “बंच बिड” प्रावधान होने के बावजूद कोटेशन पद्धति अपनाकर खुला उल्लंघन
  • आरोपियों की अधिकारियों से मिलीभगत की आशंका
  • बाजार मूल्य लगभग 40 लाख, लेकिन खरीदी 1 करोड़ से ऊपर

गंभीर आरोप: करोड़ों की संगठित गड़बड़ी

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि:

  • खरीदी विभाग के अधिकारी और फर्मों की मिलीभगत से शासन को करोड़ों का नुकसान
  • ऑर्डर देने में पारदर्शिता का अभाव
  • जिन फर्मों को ऑर्डर मिले, उनका आपस में रिश्तेदारी या व्यावसायिक समूह से जुड़े होने का संदेह

7 दिन में रिपोर्ट देने कमेटी गठित

उच्च शिक्षा संचालनालय के आयुक्त ने आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई है।
समिति इस प्रकार है—

  • डॉ. किशोर कुमार तिवारी, अपर संचालक — संयोजक
  • डॉ. गोवर्धन यादव, सहायक संचालक — सदस्य
  • महेश कुमार साहू, सहायक संचालक (वित्त) — सदस्य

समिति को 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।