पुतिन का भारत दौरा: न्यूक्लियर सबमरीन करार, S-400 पर चर्चा और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा

व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा: रक्षा, रणनीतिक साझेदारी और न्यूक्लियर सबमरीन करार पर बड़ी प्रगति

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का आगामी 4-5 दिसंबर 2025 का भारत दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुतिन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और दोनों नेता 23वें भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

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यह दौरा दोनों देशों के बीच दशकों पुराने ‘स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ को नई दिशा देने के साथ-साथ व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्रों में गहरे सहयोग को मजबूत करेगा।


भारत-रूस रक्षा सहयोग में बड़ा कदम: न्यूक्लियर सबमरीन करार

राष्ट्रपति पुतिन के आगमन से पहले ही रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। भारत और रूस के बीच न्यूक्लियर सबमरीन (SSN – चक्र क्लास) को लेकर समझौता हो गया है।

समझौते की प्रमुख बातें:

  • रूस, भारत को परमाणु संयंत्र से चलने वाली ‘चक्र क्लास’ न्यूक्लियर सबमरीन लीज पर देगा।
  • रूस ने भरोसा दिलाया है कि यह सबमरीन 2028 तक पूरी तरह रिफिट करके भारत को सौंप दी जाएगी।
  • भारतीय नौसेना चाहती है कि यह महत्वपूर्ण सबमरीन 2027 तक उपलब्ध हो जाए।

यह सबमरीन भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को बेहद मजबूत करेगी। इससे पहले भी भारत ने रूस से 2012 में आईएनएस चक्र को 10 साल की लीज पर लिया था, जिसे 2022 में वापस भेज दिया गया।

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S-400 डिफेंस सिस्टम भी एजेंडे में

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव के अनुसार, पुतिन की यात्रा के दौरान S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर भी चर्चा संभव है।
भारत पहले ही S-400 सिस्टम की खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ा चुका है और रूस से इसकी आपूर्ति से जुड़ी बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच रही है।


व्यापारिक साझेदारी में भी तेजी

भारत और रूस दोनों ही अब अपनी पुरानी दोस्ती को व्यापारिक साझेदारी के रूप में विस्तार देना चाहते हैं। द्विपक्षीय व्यापार 2025 में नई ऊंचाइयों पर है और दोनों देश ऊर्जा, अंतरिक्ष, विज्ञान और फार्मा सेक्टर में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

इस राजकीय दौरे में—

  • रुपये-रूबल लेन-देन
  • कच्चे तेल की सप्लाई
  • तकनीकी सहयोग
  • औद्योगिक साझेदारियां

जैसे विषयों पर भी महत्वपूर्ण वार्ता होने की संभावना है।


रणनीतिक साझेदारी को नई परिभाषा

भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी रक्षा एवं रणनीतिक साझेदारी अब नए आयाम की ओर बढ़ रही है। पुतिन और मोदी की मुलाकात—

  • वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों
  • रक्षा आधुनिकीकरण
  • इंडो-पैसिफिक संदर्भ
  • वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा

को ध्यान में रखते हुए भविष्य का रोडमैप तय करेगी।