एसिड अटैक मामलों में सुप्रीम कोर्ट सख्त: 16 साल से लंबित ट्रायल को बताया राष्ट्रीय शर्म

एसिड अटैक मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 16 साल से लंबित ट्रायल को बताया राष्ट्रीय शर्म

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में एसिड अटैक के मामलों के वर्षों तक लंबित रहने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में 2009 के केस का ट्रायल 16 साल बाद भी पूरा न होना राष्ट्रीय शर्म है

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चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने सभी हाईकोर्ट्स को निर्देश दिया है कि एसिड अटैक के पेंडिंग मामलों का पूरा ब्योरा 4 हफ्तों के भीतर जमा किया जाए। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों के जल्द निपटारे के लिए स्पेशल कोर्ट बनाए जा सकते हैं


NCRB के आंकड़े—844 केस अभी भी लंबित

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2025 में जारी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 तक देशभर की अदालतों में एसिड अटैक से जुड़े 844 मामले लंबित हैं।

रिपोर्ट बताती है कि

  • 2021 के बाद से एसिड अटैक के केस लगातार बढ़े हैं
  • Florida International University की 2024 रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल 250 से 300 केस दर्ज होते हैं,
  • जबकि विशेषज्ञों के अनुसार वास्तविक संख्या 1,000 से अधिक हो सकती है

मध्य प्रदेश में 6 साल में 52 केस

NCRB डेटा के अनुसार 2018 से 2023 के बीच मध्य प्रदेश में 52 एसिड अटैक केस दर्ज हुए
यह साफ संकेत है कि देश के कई राज्यों में स्थिति अभी भी गंभीर है।

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“एसिड पिलाने” के मामले सुनकर हैरान हुआ सुप्रीम कोर्ट

जनहित याचिका दायर करने वाली एसिड अटैक सर्वाइवर शाहीना मलिक ने कहा कि कई पीड़िताओं को हमलावरों ने एसिड पिलाया, जिससे वे आज गंभीर दिव्यांगता का सामना कर रही हैं और फीडिंग ट्यूब के सहारे जीवित हैं

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा:
“एसिड फेंकने के मामले तो सुने थे, एसिड पिलाने के मामले नहीं देखे। ऐसे आरोपियों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए।”


सरकार ने दी गंभीरता से कार्रवाई की आश्वस्ति

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से देखेगी।
कोर्ट ने केंद्र से यह भी कहा कि संसद या अध्यादेश के जरिए कानून में संशोधन किया जाए ताकि ट्रायल तेज और प्रभावी हो सके।


पीड़िताओं को दिव्यांगता का दर्जा देने की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग को नोटिस जारी किया है।
याचिका में मांग है कि
एसिड अटैक सर्वाइवर्स को आधिकारिक रूप से ‘दिव्यांग’ कैटेगरी में शामिल किया जाए,
जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिल सके।