राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संताली भाषा में संविधान का किया लोकार्पण, ओलचिकी लिपि में उपलब्ध होना गौरव का क्षण

नई दिल्ली।राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में संताली भाषा में भारत के संविधान का लोकार्पण किया। यह संविधान ओलचिकी लिपि में प्रकाशित किया गया है, जिसे संताली समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि संताली भाषा में संविधान का उपलब्ध होना पूरे संताली समाज के लिए गर्व और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अब ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार सहित विभिन्न राज्यों में रहने वाले संताली समुदाय के लोग अपनी मातृभाषा और लिपि में संविधान को पढ़-समझ सकेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि लोकतंत्र, समानता, अधिकारों और कर्तव्यों की आत्मा है। जब कोई नागरिक इसे अपनी भाषा में समझता है, तो उसका लोकतंत्र से जुड़ाव और अधिक मजबूत होता है। संताली भाषा में संविधान का प्रकाशन सामाजिक समावेशन और भाषाई विविधता के सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि इससे संताली समाज के लोग संविधान के अनुच्छेदों, अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे, जिससे लोकतांत्रिक चेतना और संवैधानिक मूल्यों का विस्तार होगा। यह पहल भारत की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक पहचान को और सुदृढ़ करती है।

कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों, भाषाविदों और समाज के प्रतिनिधियों ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह आदिवासी भाषाओं को मुख्यधारा में सम्मान देने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। संताली भाषा को संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने के बाद अब संविधान का संताली में प्रकाशित होना समुदाय के लिए एक नई उपलब्धि है।

संताली भाषा में संविधान के लोकार्पण को लेकर विभिन्न राज्यों में संताली समाज के लोगों में उत्साह और प्रसन्नता का माहौल देखा जा रहा है। इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए संवैधानिक जागरूकता का मजबूत आधार माना जा रहा है।

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