
महासमुंद में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण 2026, 21 फरवरी को होगा अंतिम प्रकाशन
महासमुंद जिले में भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 की प्रक्रिया तेज़ी से जारी है। दावा-आपत्ति के बाद 21 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होगा।
महासमुंद, 20 फरवरी 2026/भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार अर्हता तिथि 01 जनवरी 2026 के आधार पर प्रदेशभर में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2026 की प्रक्रिया तेज़ी से संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी एवं त्रुटिरहित बनाना है।
एसआईआर के अंतर्गत ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन 23 दिसंबर 2025 को किया गया था। इसके बाद 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 तक दावा एवं आपत्ति की प्रक्रिया पूरी की गई। प्राप्त आवेदनों पर सुनवाई एवं दस्तावेज सत्यापन 14 फरवरी 2026 तक किया गया।
नोटिस जारी कर मांगे गए दस्तावेज
गणना चरण के दौरान जिन मतदाताओं का मिलान वर्ष 2003 की विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची से नहीं हो पाया, उन्हें संबंधित विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा दस्तावेज प्रस्तुत करने हेतु नोटिस जारी किए गए। सभी मतदाताओं को सुनवाई का पूर्ण अवसर दिया गया। सुनवाई के दौरान भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य 13 निर्धारित दस्तावेजों में से आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।
प्रपत्र-6, 7 और 8 के माध्यम से किए गए आवेदन
ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद, दावा-आपत्ति अवधि के दौरान:
- प्रपत्र-6 – नए नाम जोड़ने हेतु
- प्रपत्र-8 – मतदाता विवरण में सुधार हेतु
- प्रपत्र-7 – नाम विलोपन एवं आपत्ति हेतु
आवेदन प्राप्त किए गए, जिनका नियमानुसार निराकरण किया जा रहा है।
राजनीतिक दलों के साथ साप्ताहिक बैठकें
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दावा-आपत्ति अवधि के दौरान विधानसभा स्तर पर साप्ताहिक बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में प्राप्त दावों एवं आपत्तियों की सूची मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ साझा की गई, जिससे पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने एवं अपात्र नाम हटाने की प्रक्रिया में सहयोग मिल सके।
21 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन
सभी दावों एवं आपत्तियों की सुनवाई और सत्यापन प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात 21 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान प्राप्त सभी दावा-आपत्तियों की सूची मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है, जिसे कोई भी नागरिक देख सकता है।
नाम विलोपन को लेकर फैल रही अफवाहें भ्रामक
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर फैलाए जा रहे दावे पूरी तरह भ्रामक हैं।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 22 के तहत किसी मतदाता का नाम केवल इन तीन परिस्थितियों में ही हटाया जा सकता है:
- मतदाता की मृत्यु होने पर
- स्थायी रूप से निवास स्थान बदलने पर
- नाम का दोहराव होने पर
विशेष गहन पुनरीक्षण की यह प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी एवं विधि सम्मत है, जिसका उद्देश्य किसी भी पात्र मतदाता को वंचित करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय बनाना है।











