मेडिकल खरीदी घोटाला: ED ने मोक्षित कॉर्पोरेशन के पार्टनर शशांक चोपड़ा को किया गिरफ्तार

मेडिकल उपकरण खरीदी घोटाला: ईडी ने मोक्षित कॉर्पोरेशन के पार्टनर शशांक चोपड़ा को किया गिरफ्तार

टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर कर CGMSC को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने का आरोप

रायपुर | 18 जनवरी 2026 |प्रवर्तन निदेशालय (ED) रायपुर जोनल कार्यालय ने मेडिकल उपकरण एवं रिएजेंट खरीदी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मोक्षित कॉर्पोरेशन (M/s Mokshit Corporation) के पार्टनर शशांक चोपड़ा को 14 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई।

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ईडी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शशांक चोपड़ा को 15 जनवरी 2026 को विशेष न्यायालय (PMLA), रायपुर में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 4 दिनों की ईडी रिमांड पर भेज दिया है, जो 19 जनवरी 2026 तक प्रभावी रहेगी।

CGMSC को भारी आर्थिक नुकसान का आरोप

ईडी की जांच के अनुसार, यह मामला छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) से जुड़ी मेडिकल उपकरण एवं रिएजेंट की खरीदी में हुए घोटाले से संबंधित है। आरोप है कि शशांक चोपड़ा ने CGMSC तथा स्वास्थ्य विभाग (DHS एवं CGMSCL) के अधिकारियों के साथ आपराधिक साजिश के तहत टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर किया।

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जांच में सामने आया है कि फर्जी मांग दर्शाकर और टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित कर मेडिकल उपकरण व रिएजेंट अत्यधिक कीमतों पर CGMSC को सप्लाई किए गए, जिससे राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ और आरोपियों को अवैध लाभ पहुंचा।

अवैध धन की लेयरिंग और संपत्ति सृजन

ईडी के अनुसार, अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) को छिपाने के लिए शशांक चोपड़ा ने कई शेल कंपनियों और फर्मों के माध्यम से धन का लेयरिंग किया। फर्जी सर्विस एग्रीमेंट के जरिए ट्रेनिंग और मेंटेनेंस सेवाओं के नाम पर भुगतान दिखाया गया, जिसके बाद बड़ी रकम नकद निकाली गई और उससे चल-अचल संपत्तियां अर्जित की गईं।

₹7 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त/सीज

ईडी ने पहले की गई तलाशी कार्रवाई (धारा 17, PMLA) के दौरान आरोपी एवं उसके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान

  • बैंक बैलेंस
  • फिक्स्ड डिपॉजिट
  • शेयर
  • वाहन

कुल मिलाकर ₹7 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त/सीज की गई हैं। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल डिवाइसेस भी बरामद हुए हैं, जिनसे धन शोधन और लेयरिंग के सबूत मिले हैं।

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।