बस्तर के 47 नक्सल प्रभावित गांवों में लहराया तिरंगा, लोकतंत्र की निर्णायक जीत: विष्णुदेव साय

बस्तर के 47 नक्सल प्रभावित गांवों में दशकों बाद फहरा तिरंगा, गणतंत्र दिवस पर लोकतंत्र की ऐतिहासिक जीत

 रायपुर | 27 जनवरी 2026 | 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल से एक ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई, जब 47 नक्सल प्रभावित गांवों में दशकों बाद पूरे सम्मान और गर्व के साथ तिरंगा फहराया गया। यह केवल ध्वजारोहण का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि लाल आतंक पर भारत के सशक्त लोकतंत्र की निर्णायक विजय का प्रतीक बनकर उभरा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर को लोकतंत्र का सवेरा बताते हुए कहा कि जहां कभी भय, हिंसा और बंदूक का राज था, वहां आज संविधान, विश्वास और राष्ट्रगान की गूंज सुनाई दे रही है।

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इन गांवों में तिरंगा फहरना बस्तर के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय तक नक्सल हिंसा के साये में रहे इन क्षेत्रों में गणतंत्र दिवस का आयोजन कर पाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। वर्षों तक यहां सरकारी पहुंच, मतदान, स्कूल और विकास योजनाएं बाधित रहीं, लेकिन आज वही गांव लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ते नजर आए।

भय से विश्वास तक का सफर

नक्सल प्रभावित इलाकों में तिरंगा फहराने का रास्ता आसान नहीं था। इसके पीछे सुरक्षा बलों की निरंतर कार्रवाई, प्रशासन की संवेदनशील रणनीति और सरकार की विकासपरक सोच की अहम भूमिका रही है। गांव-गांव में सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, राशन, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ, जिससे स्थानीय लोगों का भरोसा धीरे-धीरे लौटा।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस उनके लिए सिर्फ तारीखें थीं, क्योंकि डर के माहौल में कोई सार्वजनिक आयोजन संभव नहीं था। लेकिन इस बार बच्चों ने हाथों में तिरंगा थामा, महिलाओं ने देशभक्ति गीत गाए और बुजुर्गों की आंखों में वर्षों बाद उम्मीद की चमक दिखाई दी।

मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस ऐतिहासिक अवसर पर कहा कि बस्तर के इन गांवों में तिरंगा फहरना साबित करता है कि भारत का लोकतंत्र किसी भी चुनौती से बड़ा है। उन्होंने कहा कि यह उन सुरक्षाबलों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों की जीत है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी लोकतंत्र पर भरोसा बनाए रखा।

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मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इन गांवों को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और विकास के हर मोर्चे पर मजबूत बनाना है, ताकि भविष्य में कोई भी युवा हिंसा का रास्ता न चुने।

सुरक्षाबलों की अहम भूमिका

इस सफलता में पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य अर्धसैनिक बलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। वर्षों से जोखिम भरे हालात में तैनात जवानों ने न केवल नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण पाया, बल्कि ग्रामीणों के साथ संवाद और विश्वास कायम करने का भी कार्य किया। सामुदायिक पुलिसिंग और जनसंपर्क अभियानों ने लोगों को यह भरोसा दिलाया कि सरकार और सुरक्षा बल उनके साथ हैं।

बच्चों और युवाओं में नई उम्मीद

गणतंत्र दिवस के आयोजनों के दौरान स्कूली बच्चों द्वारा राष्ट्रगान और देशभक्ति कार्यक्रमों की प्रस्तुति ने माहौल को भावुक बना दिया। कई गांवों में पहली बार बच्चों ने खुले मंच पर “जन-गण-मन” गाया। युवाओं ने इसे अपने भविष्य के लिए एक नई शुरुआत बताया और कहा कि अब वे शिक्षा और रोजगार के जरिए आगे बढ़ना चाहते हैं।

विकास की ओर बढ़ता बस्तर

सरकार का मानना है कि तिरंगा फहराना केवल प्रतीकात्मक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह विकास की निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा है। आने वाले समय में इन गांवों में स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, कौशल विकास प्रशिक्षण और स्वरोजगार योजनाओं को और मजबूत किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र की यह जीत तभी स्थायी होगी, जब विकास हर घर तक पहुंचेगा।

लोकतंत्र की जीत का प्रतीक

बस्तर के 47 गांवों में तिरंगे का फहराना पूरे देश के लिए यह संदेश है कि हिंसा और डर के रास्ते का कोई भविष्य नहीं, जबकि लोकतंत्र, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान हैं। गणतंत्र दिवस 2026 पर यह दृश्य न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक प्रेरणादायक क्षण के रूप में दर्ज हो गया।

जहां कभी गोलियों की आवाजें गूंजती थीं, वहां आज राष्ट्रगान की अनुगूंज है। जहां कभी भय था, वहां आज विश्वास है। और यही है भारत के लोकतंत्र की असली ताकत।