इंदौर नगर निगम घोटाला: राजेश कोठारी पर ED की कार्रवाई, 1.30 करोड़ की संपत्ति कुर्क

इंदौर नगर निगम में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा

ED का शिकंजा: सहायक राजस्व अधिकारी राजेश कोठारी पर PMLA केस, 1.30 करोड़ की संपत्ति कुर्क

इंदौर। मध्यप्रदेश के सबसे बड़े नगर निगमों में शुमार इंदौर नगर निगम से जुड़े एक बड़े भ्रष्टाचार मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए सहायक राजस्व अधिकारी राजेश कोठारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत अभियोजन शिकायत दाखिल कर दी है।

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ED, इंदौर जोनल कार्यालय द्वारा दायर यह अभियोजन शिकायत 16 दिसंबर 2025 को विशेष PMLA न्यायालय, इंदौर में प्रस्तुत की गई थी। जांच में सामने आया है कि आरोपी अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर करोड़ों रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित की, जिसे ईडी ने अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) माना है।

इस कार्रवाई के बाद नगर निगम, प्रशासनिक महकमे और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है


लोकायुक्त FIR से ED जांच तक: 14 साल पुराना मामला

यह मामला कोई नया नहीं है। इसकी जड़ें वर्ष 2011 में दर्ज लोकायुक्त पुलिस, उज्जैन की FIR से जुड़ी हैं।
लोकायुक्त पुलिस ने FIR क्रमांक 77/2011 (दिनांक 16 जुलाई 2011) दर्ज कर राजेश कोठारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(d) सहपठित 13(2) के तहत मामला कायम किया था।

इसके बाद लंबी जांच प्रक्रिया चली और 12 मार्च 2020 को लोकायुक्त द्वारा चार्जशीट दाखिल की गई।
इसी चार्जशीट और FIR को आधार बनाकर ईडी ने PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की।


कौन है राजेश कोठारी और क्यों अहम है यह मामला

राजेश कोठारी इंदौर नगर निगम में सहायक राजस्व अधिकारी के पद पर पदस्थ था। इस पद पर रहते हुए उसके पास—

  • संपत्ति कर निर्धारण
  • राजस्व वसूली
  • कर रिकॉर्ड का संधारण
  • नगर निगम से जुड़े वित्तीय मामलों

जैसी अत्यंत संवेदनशील जिम्मेदारियां थीं।

ईडी के अनुसार, इसी पद का दुरुपयोग कर आरोपी ने आर्थिक लाभ अर्जित किया, जो उसकी वैध आय से कहीं अधिक पाया गया।


आय बनाम संपत्ति: 2.51 करोड़ का बड़ा अंतर

ईडी और लोकायुक्त की संयुक्त पड़ताल में आरोपी की—

  • वेतन
  • भत्ते
  • वैध घोषित आय
  • अनुमेय निवेश

का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। इसके मुकाबले जब—

  • अचल संपत्तियों का बाजार मूल्य
  • बैंक खातों में जमा धन
  • नकद लेन-देन
  • परिवार के सदस्यों के नाम निवेश

को जोड़ा गया, तो 2,51,86,444 रुपये की अनुपातहीन संपत्ति सामने आई।

ईडी का कहना है कि आरोपी इस अंतर का कोई वैधानिक और संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका


परिवार के नाम पर संपत्तियां, मनी ट्रेल छिपाने की कोशिश

जांच में यह भी उजागर हुआ कि—

  • कई संपत्तियां पत्नी और अन्य पारिवारिक सदस्यों के नाम पर खरीदी गईं
  • वास्तविक नियंत्रण और लाभ राजेश कोठारी के पास ही रहा
  • कुछ लेन-देन नकद में किए गए

ईडी के अनुसार, यह तरीका आमतौर पर अवैध आय को वैध दिखाने और मनी ट्रेल छिपाने के लिए अपनाया जाता है।

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PMLA के तहत 1.30 करोड़ की संपत्ति कुर्क

मनी लॉन्ड्रिंग की पुष्टि होने के बाद ईडी ने PMLA, 2002 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए—

  • 1,30,91,803 रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया
  • इन संपत्तियों को Proceeds of Crime घोषित किया

ईडी का कहना है कि ये संपत्तियां सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से अर्जित धन से खरीदी गई हैं।


PMLA में क्यों गंभीर है यह मामला

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, PMLA के तहत मामला दर्ज होना बेहद गंभीर माना जाता है क्योंकि—

  • इसमें जमानत की शर्तें सख्त होती हैं
  • दोष सिद्ध होने पर 7 साल तक की सजा और भारी जुर्माना संभव है
  • संपत्तियों की स्थायी जब्ती का प्रावधान है

यही कारण है कि यह मामला केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर अपराध के रूप में देखा जा रहा है।


नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस कार्रवाई ने इंदौर नगर निगम की आंतरिक निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • इतने लंबे समय तक
  • इतने बड़े पैमाने पर
  • आय से अधिक संपत्ति का अर्जन

यदि बिना किसी ठोस आपत्ति के चलता रहा, तो यह प्रशासनिक विफलता का संकेत है।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर सकती हैं।


बेनामी एंगल भी जांच के दायरे में

हालांकि प्रेस रिलीज़ में सीधे तौर पर बेनामी शब्द का उपयोग नहीं किया गया है, लेकिन—

  • परिवार के नाम संपत्तियां
  • वास्तविक नियंत्रण आरोपी के पास
  • आय का स्पष्ट स्रोत नहीं

जैसे तथ्य बेनामी संपत्ति निषेध अधिनियम के तहत आगे की जांच का आधार बन सकते हैं।


देशभर में ED की सख्त कार्रवाई का हिस्सा

गौरतलब है कि बीते वर्षों में ED ने—

  • नगर निगम
  • स्थानीय निकाय
  • विकास प्राधिकरण
  • राजस्व विभाग

से जुड़े मामलों में आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज की है।
राजेश कोठारी का मामला इसी राष्ट्रीय स्तर की कार्रवाई की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।


अब आगे क्या होगा

अब इस मामले में—

  • विशेष PMLA कोर्ट में नियमित सुनवाई
  • अभियोजन पक्ष द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत
  • आरोपी का बचाव पक्ष
  • कुर्क संपत्तियों की पुष्टि या निरस्तीकरण

जैसे अहम चरण आने वाले समय में तय होंगे।

ईडी ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और नए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।

इंदौर नगर निगम से जुड़ा यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं है। यह—

  • सार्वजनिक पदों पर पारदर्शिता
  • जवाबदेही
  • और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई

का स्पष्ट संदेश देता है।

ईडी की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि सरकारी पद पर रहते हुए अर्जित की गई हर संपत्ति की जांच होगी और कानून से ऊपर कोई नहीं है