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236 करोड़ बैंक फ्रॉड: ED का खुलासा, पूर्व RP पर प्रमोटर्स से साठगांठ कर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

236 करोड़ बैंक फ्रॉड मामला: ED का बड़ा खुलासा, पूर्व RP पर मनी लॉन्ड्रिंग में सक्रिय साजिश का आरोप

गुरुग्राम, 05 फरवरी 2026/प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 236 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में Richa Industries Limited (RIL) के पूर्व रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) अरविंद कुमार के खिलाफ गंभीर खुलासे किए हैं। ED के अनुसार, अरविंद कुमार ने दिवाला प्रक्रिया (CIRP) की आड़ में पूर्व प्रमोटर्स के साथ मिलीभगत कर मनी लॉन्ड्रिंग की पूरी चेन को जारी रखा

ED ने अरविंद कुमार को 03 फरवरी 2026 को PMLA, 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। उन्हें विशेष न्यायालय, गुरुग्राम में पेश किया गया, जहां से 8 दिन की ED कस्टडी मंजूर की गई। इससे पहले कंपनी के पूर्व प्रमोटर एवं निलंबित प्रबंध निदेशक संदीप गुप्ता को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।


CBI की FIR से शुरू हुई जांच

ED ने यह जांच CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। आरोप है कि 2015 से 2018 के बीच आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के जरिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 236 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।


CIRP के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग की निरंतरता

ED की जांच में सामने आया है कि अरविंद कुमार ने RP रहते हुए—

  • कॉन्ट्रैक्ट्स, रेम्यूनरेशन और ऑपरेशनल पेमेंट्स के नाम पर धन का भुगतान जारी रखा, जिससे
    👉 बैंक फ्रॉड से शुरू हुई मनी लॉन्ड्रिंग की चेन लगातार चलती रही
  • कंपनी के पैसों को लेयर्ड ट्रांजैक्शन्स के जरिए
    अपने करीबी व्यक्तियों, सहयोगियों और कर्मचारियों तक पहुंचाया
  • बाद में इन पैसों को अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कराया

बैंक रिकॉर्ड के अनुसार—

  • RP के कार्यकाल में 80 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध नकद जमा
  • और 1 करोड़ रुपये से अधिक की क्रेडिट एंट्री संबंधित पक्षों से पाई गई

पूर्व प्रमोटर्स से साठगांठ के गंभीर आरोप

ED का आरोप है कि RP ने—

  • पूर्व प्रमोटर्स को प्रमुख प्रोजेक्ट्स और संपत्तियों पर संचालन नियंत्रण बनाए रखने दिया
  • निर्णय प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी को अधिकृत किया
  • ऐसी व्यवस्थाओं में हस्तक्षेप नहीं किया, जिनसे
    👉 नई-नई बनाई गई कंपनियों को लाभ
    👉 निलंबित निदेशकों को व्यक्तिगत फायदा मिला

जानबूझकर कानूनी कार्रवाई से परहेज

ED ने कहा कि—

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  • ऑडिट रिपोर्ट में
    प्रेफरेंशियल, अंडरवैल्यूड, फ्रॉड्यूलेंट और एक्सटॉर्शन जैसी ट्रांजैक्शन्स के स्पष्ट संकेत होने के बावजूद
  • RP ने IBC की संबंधित धाराओं के तहत अवॉइडेंस एप्लीकेशन जानबूझकर दाखिल नहीं की,
    जिससे मूल आरोपियों को अवैध धन का लाभ उठाने का अवसर मिला

प्रमोटर परिवार की कंपनियों को आगे बढ़ाया

जांच में यह भी सामने आया कि—

  • IBC की धारा 29A का उल्लंघन करते हुए
  • प्रमोटर परिवार के नियंत्रण वाली संस्थाओं द्वारा दाखिल अयोग्य रेजोल्यूशन प्लान्स को आगे बढ़ाया गया
  • उद्देश्य स्पष्ट था—
    👉 कंपनी और उसकी संपत्तियां उन्हीं लोगों को वापस दिलाना,
    जिन्होंने मूल धोखाधड़ी की थी

 बिना अधिकार करोड़ों की वसूली

ED का आरोप है कि RP ने—

  • कंपनी या उसकी संपत्तियों की बिक्री के नाम पर
  • बिना किसी वैध अनुमति या दस्तावेज के कई पक्षों से करोड़ों रुपये वसूल किए

बैंकों को 94% का भारी नुकसान

ED के अनुसार, RP द्वारा रची गई “प्रो-प्रमोटर साजिश” का नतीजा यह हुआ कि—

  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 94% का हेयरकट झेलना पड़ा
  • RIL के लिक्विडेशन के बाद
    • 708 करोड़ रुपये के दावों के बदले बैंकों को केवल 40 करोड़ रुपये ही मिल पाए

पहले भी निलंबित हो चुका है RP

यह भी उल्लेखनीय है कि—

  • इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (IBBI)
  • ने अरविंद कुमार का RP पंजीकरण पहले ही 2 वर्षों के लिए निलंबित कर दिया था,
    जो इसी तरह की अनियमितताओं से जुड़ा था

ED का सख्त संदेश

ED ने कहा कि—

दिवाला कानून के ढांचे का इस तरह का दुरुपयोग न केवल लेनदारों की वसूली और कंपनी पुनर्जीवन के उद्देश्यों को विफल करता है, बल्कि वित्तीय और दिवाला व्यवस्था में जनता के भरोसे को भी कमजोर करता है

ED ने स्पष्ट किया कि—

  • धन के पूरे प्रवाह (money trail) की जांच
  • और सभी संलिप्त व्यक्तियों की पहचान
    अब भी जारी है
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