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स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल…. छत्तीसगढ़ के लिए नई संभावनाओं का होगा निर्माण

दुर्ग : लेख : स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल…. छत्तीसगढ़ के लिए नई संभावनाओं का होगा निर्माण

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वैश्वीकरण के दौर की संभावनाओं का लाभ उठाना है तो इसके साथ कदमताल कर चलना होगा। वैश्वीकरण के साथ चलने के लिए इसकी भाषा भी जाननी होगी और इसकी भाषा है अंग्रेजी। यदि हम स्थानीय भाषाएं जानते हैं तो केवल अपने क्षेत्र के भीतर अथवा देश के भीतर ही बेहतर कार्य के अवसर प्राप्त कर सकते हैं लेकिन अंग्रेजी का ज्ञान होने से हम वैश्विक क्षितिज में अपनी संभावनाएं तलाश सकते हैं। छत्तीसगढ़ अन्य राज्यों की तुलना में साफ्टवेयर में इसलिए उल्लेखनीय प्रगति नहीं कर पाया क्योंकि यहाँ प्रतिभाशाली बच्चे तो थे लेकिन इंग्लिश में तंग थे। ग्लोबल साफ्टवेयर कंपनियों के क्लाइंट दुनिया भर में होते हैं और जाहिर है कि उनसे सतत संवाद आवश्यक होता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि अपनी प्रतिभा के बूते लोग इन कंपनियों में अपनी जगह बना लेते हैं लेकिन प्रबंधकीय स्तर पर जाने से अपनी अंग्रेजी की कमी की वजह से चूक जाते हैं अथवा उन्हें इस स्तर पर अपनी जगह बनाने के लिए पुनः काफी मेहनत करनी होती है और अंग्रेजी को मजबूत करना होता है। भविष्य में छत्तीसगढ़ में साफ्टवेयर इंडस्ट्री तेजी से पनपेगी क्योंकि छत्तीसगढ़ के अनेक युवा ऐसे हैं जो इस क्षेत्र में उद्यम कर रहे हैं और धीरे-धीरे इनके उद्यम से यहाँ भी लघु आकार की साफ्टवेयर इंडस्ट्री पोषित हो रही है। इंग्लिश शिक्षा तेजी से बढ़ी है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल आरंभ कर उन बच्चों के लिए भी अंग्रेजी सीखने के अवसर सुलभ करा दिये जो प्रतिभाशाली हैं लेकिन या तो फीस की वजह से अथवा इंग्लिश मीडियम स्कूलों से दूरी की वजह से पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे। स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूलों के पीछे सोच यह भी है कि एक विदेशी भाषा को आत्मसात करना एक पकी हुई उम्र में कठिन होता है। बच्चों के लिए यह आसान होता है। भाषा की जानकारी के साथ ही इसका लहजा भी काफी महत्वपूर्ण होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी भाषा के बोलने के लहजे को बिल्कुल मुकम्मल तरीके से अपनाना केवल बचपन में ही संभव होता है। दुनिया भर में बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग का काम हो रहा है। काल सेंटर के माध्यम से विदेशों में बैठे क्लाइंट अपने लोकल सर्विस प्रोवाइडर्स के माध्यम से कार्य करा रहे हैं। ऐसे में अंग्रेजी के अच्छे ज्ञान के साथ ही अच्छा लहजा भी होना चाहिए।
इसके अलावा भी अंग्रेजी भाषा आने से दुनिया भर में होने वाले तकनीकी बदलाव हम उसी भाषा में बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। यद्यपि आजकल अंग्रेजी से अनुवाद भी स्थानीय भाषाओं में होने लगे हैं। फिर भी अनुवाद पूरी तरह से मूल भाषा में कही बात को संप्रेषित करने में अक्षम होता है। इसलिए चाहे तकनीकी जानकारी हो अथवा साहित्यिक जानकारी हो, इस बड़े खजाने को प्राप्त करना है तो अंग्रेजी की जानकारी अपेक्षित है।
इसके साथ यह भी है कि आजकल बाजार में जिन पेशेवरों की आवश्यकता है उनसे अंग्रेजी की आकर्षक शब्दावली और ग्रामर की शुद्धता की आशा नहीं की जाती, उनसे तो केवल यही अपेक्षा की जाती है कि वे बाजार की जरूरतों के मुताबिक अंग्रेजी बोल सकें एवं समझ सकें और कंपनी का कार्यव्यवहार बेहतर तरीके से निपटता रहे। इस लिहाज से छत्तीसगढ़ में स्वामी आत्मानंद स्कूलों में जो अंग्रेजी शिक्षा दे रही है वो गुणवत्ता के मामले में बेहतरीन हैं। जिस तरह से अभिभावक इन स्कूलों में अपने बच्चों का एडमिशन करा रहे हैं उससे पता चलता है कि यह अपने उद्देश्य में सफल रही हैं।

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