Advertisement

धान की फसलों में कीट-पतंगों के प्रकोप की रोकथाम के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाहq

धान की फसलों में कीट-पतंगों के प्रकोप की रोकथाम के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

बेमेतरा : धान की फसलों में कीट-पतंगों के प्रकोप की रोकथाम के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

Gemini_Generated_Image_fohysbfohysbfohy
WhatsApp-Image-2026-03-12-at-6.48.17-PM-1-298x300 (1)
sjjj
धान की फसलों में कीट-पतंगों के प्रकोप की रोकथाम के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

धान की फसलों में कीट-पतंगों के प्रकोप की रोकथाम के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

बेमेतरा 18 अक्टूबर 2021छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है। प्रदेश को धान का कटोरा के नाम से जाना जाता है। यहां लगभग 80 प्रतिशत लोग खेती-किसानी का कार्य करते हैं। वर्तमान समय में धान में बालियां आने लगी है। ऐसे समय में कीट पतंगों का प्रकोप बढ़ जाता है। सरना, बासमती, जवांफूल, दुबराज, आईआर-36, गुरमटिया, मसूरी, स्वर्णा, स्वर्णा सब-1 एच.एम.टी. एमयूटी-1010, एमटीयू-1001, राजेश्वरी, सुगंधित सहित लगभग 20 हजार से अधिक किस्म के धान की खेती किसानों द्वारा की जाती है। वर्तमान समय में फसल पर कीटव्याधि एवं रोग लगने की प्रबल संभावना है। ऐसे समय में कृषि वैज्ञानिकों के परामर्श के अनुसार कीटों के प्रकोप को रोकने के लिए आवश्यक उपाय जरूरी है। इन फसलों में कीट-पतंगों के प्रकोप से बचने के निम्नलिखित सलाह कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी गई है।
आभासी कंड रोग – यह एक फूफंदी जनित रोग है। रोग के लक्षण पौधों में की बालियों के निकलने के बाद ही स्पष्ट होता है। रोग ग्रस्त दाने पीले से लेकर संतरे रंग के होते हैं। जो बाद में जैतूनी काले रंग के गोले में बदल जाता है। उपचार – खेतों में जलभराव अधिक नहीं होना चाहिए। रोग के लक्षण दिखाई देने पर प्रॉपेकोनेजोल 20 मिलीलीटर मात्रा में 15 से 20 लीटर पानी में घोलकर का छिड़काव करें। कंडुआ रोग – इस रोग के प्रकोप से धान की बालियों के जगह पीले रंग बाल बन जाता है। इसके बाद यह काले रंग का हो जाता है। यह रोग धान की फसल को 60 से 90ः तक नुकसान कर सकता है। उपचार – प्रॉपीकोनाजोल 25ः ईसी 1 मिलीलीटर, प्रति लीटर पानी के घोल में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं। भूरा माहो – यह कीट छोटे आकार तथा भूरे रंग का होता है। यह पौधे में पानी की सतह से थोड़ा ऊपर पत्तों के घने छतरी के नीचे रहते हैं। कीटों के बारे में शीघ्र पता नहीं चल पाने पर इसका नियंत्रण अधिक जटिल हो जाता है। उपचार – पायमेट्रोजिन 50 प्रतिशत डब्ल्यूजी -300 ग्राम प्रति हेक्टेयर, थायोमेथेक्जाम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी – 100-120 ग्राम प्रति हेक्टेयर, इमीडाक्लोरोप्रीड 17.8 प्रतिशत एसएल – 150-200 मि.ली. प्रति हेक्टेर, फिप्रोनिल 3 प्रतिशत $ ब्यूप्रोफेजिन 22 प्रतिशत- 500 मि.ली. प्रति हेक्टेयर, ब्यूप्रोफेजिन 15 प्रतिशत $ एसीफेट 35 प्रतिशत 50 ग्राम प्रति हेक्टेयर, डाइनोटेफ्यूरॉन 20 प्रतिशत एस.जी. 175 ग्राम प्रति हेक्टेयर में से किसी एक दवा का प्रयोग किया जा सकता है।

ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.16.05