शाक सप्तमी : 11 नवंबर 2021 शाक किस राशि एवं नाम वालों को सप्तमी प्रयोग आरोग्य एवं भविष्य के लिए सुरक्षाप्रद रहेगा?

शाक सप्तमी- आरोग्य, भविष्य सुरक्षा( पंडित विजेंद्र कुमार तिवारी ज्योतिष शिरोमणि भोपाल 9424446706)

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11नवम्बर 2021 रोग, स्वास्थ्य उत्तम रहता है रोग आदि नहीं होते हैं एवं पाचन शक्ति में वृद्धि होती है पत्ते वाली सब्जियों का रात्रि काल में भोजन करने से व्याधि नाशक-शाक सप्तमी

कार्तिक शुक्ल सप्तमी को जो भी उपलब्ध सब्जी अर्थात पत्तों वाली मेथी पालक चोलाई लाल भाजी आदि इन सब्जियों के भोजन का विधान है।

दान
पत्ते की भाजी -सब्जियों के दान का विशेष महत्व है। देवी के मंदिर मे या 8वर्ष से का आयु की कन्या को दान कर सकते है।
दान समय प्रात 07:45, 11.45से 12.24है।

भोजन:रात्रि के भोजन में-
केवल पत्तो का या इनसे निर्मित व्यंजन का प्रयोग करना चाहिए। ऐसा कोई भी भोजन का पदार्थ जिसमें शाक या पत्ते ना हो उन व्यंजन का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। किसी भी सब्जी मे अधिकतम मात्रा शाक पत्ते की हो।
जैसे – भजिये, पकोड़े, मंगोडे,आलू- मेथी, पनीर- पालक, सोया पालक आलू, सलाद मे पालक आदि।
आजकल नेट पर पचासों रेसीपी उपलब्ध है। पूडि,परांठे, रोटी शाक युक्त ही खाये जा सकते हैं।
रात्रि के भोजन में पत्ते वाली सब्जी या या पत्ते वाले व्यंजन यह सलाद का प्रयोग करना चाहिए ।

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लाभ – रोग नाशक, रोग प्रतिरोधक
पौराणिक ग्रंथों के आधार पर इससे रोग व्याधि से सुरक्षा होती है। उसके पश्चात या प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को संपूर्ण वर्ष में किया जाना चाहिए या कर सकते हैं इससे शारीरिक स्वास्थ्य में आरोग्यता की वृद्धि होती है।
  ज्योतिष खंड-सुरक्षा कवच शाक सप्तमी।
किसके लिए शाक सप्तमी प्रयोग अनेक रोग, कष्ट को रोक कर विघ्न बाधाओं , तनाव, चिंता से मुक्ति का सुरक्षा कवच है।
ग्रहों का राजा रवि भवन भास्कर सभी वनस्पतियों चराचर वृक्ष पौधों का जीवन दाता सूर्य है ।
– जन्म कुंडली में सूर्य तुला राशि में हो या 7 के अंक पर हो।
– सूर्य की दशा अंतर्दशा चल रही हो।
– मिथुन या कर्क राशि हो।
– वृष ,मिथुन ,कन्या, तुला, मकर, कुंभ, लग्न हो ।
– जन्म 17सितंबर से 17अक्टुबर के मध्य हुआ हो।
– क, छ, ह, ड, र, त, घ, अक्षर से नाम प्रारंभ
हो।
उक्त मे से कोई भी स्थिति , (कोई भी एक स्थिति हो तो भी )सप्तमी तिथि को सूर्य का स्मरण जल दान तथा शाक का प्रयोग रात्रिकालीन समय के भोजन मे करना चाहिए। – विशेष इस दिन सेंधा नमक या काला नमक का प्रयोग करें समुद्री नमक वर्जित है।

वर्जित पदार्थ भोजन मे-
नारद -आमिष मांस, उरद, राई, खटाई तथा नशीली वस्तुओं , दाल, तिल, पकवान व दान किया हुआ भोजन , मांस नहीं छूना चाहिए। पान, कत्था, चूना, नींबू, मसूर, बासी तथा झूठे अन्न सिंघाड़ा, प्याज, मठ्ठा, गाजर, मूली, काशीफल, लौकी, तरबूज इन वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
शाकम्भरी देवी- (चौहान वंश की कुलदेवी, नवदुर्गा मे से एक, कृषि जीविका वर्ग हेतु अन्नपूर्णा।
शाकम्भरी देवी का संबंध भी शाक से है।
 मंत्र:
– ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भगवति माहेश्वरि अन्नपूर्णे स्वाहा।। – ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भगवति अन्नपूर्णे नम:।। – ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धनधान्य: सुतान्वित:। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।
कार्तिक माह मे तिथि के अनुसार वर्जित भोज्य पदार्थ-
तिथि वर्जित- प्रतिपदा को कुम्हड़ा, द्वितीया को कटहल, चतुर्थी को मूली, पंचमी को बेल, षष्ठी को तरबूज, सप्तमी को आंवला, अष्टमी को नारियल, नवमी को मूली, दशमी को लौकी, एकादशी को परवल, द्वादशी को बेर, त्रयोदशी को मठ्ठा, चतुर्दशी को गाजर तथा पूर्णिमा को शाक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। रविवार को आंवला का प्रयोग नहीं करना चाहिए।