Winning Day 13Nov.2021: आज सार्व भौम व्रत, जानें महत्व, शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, पूजन विधि

Winning Day 13 Nov.2021: आज सार्व भौम व्रत, जानें महत्व, शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, पूजन विधि

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किस नाम या राशि वालो के लिए अति उपयोगी सार्व भौम व्रत?

कार्तिक शुक्ल पक्ष दशमी को( वराह पुराण) राजनेता एवं जिनके मुकदमे या कोर्ट केस चल रहे हो उनके लिए अथवा सुरक्षाकर्मियों सैन्य क्षेत्र के लिए विजय का पर्व

 

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विजय प्राप्ति के लिए ,ईश्वर से याचना का पर्व सनातन धर्मज्ञ ऋषि-मुनियों ने अपने अतींद्रिय ज्ञान से उद्घाटित किया है ।
   – -अक्षर से प्रारंभ नाम- ओ, ई, उ, ए, ब, व, प, द, च वालो को सफलता के लिए अवश्य करना चाहिए। या
     – कन्या, मीन एवम वृष राशि या लग्न वालोके लिए। प्रत्येक माह की शुक्ल दशमी को करना उपयोगी होगा।
     कार्तिक शुक्ल पक्ष दशमी को सूर्य एवं चंद्र की  स्थिति विशेष के कारण दिशाओं के पूजन से दिग्विजय योग निर्मित होता है।
      इस दिन सभी दिशाओं की पूजा करने का विशेष महत्व है ।सभी दिशाओं की ओर , ईशान ,पूर्व, आगनेय, दक्षिण, नैऋत्य, पश्चिम, वायव्य, आकाश,पृथ्वी पर पुष्प अक्षत
प्रक्षेपित करे।उत्तर(East,SE,South,से,,West,NW,North)दिशा तथा आकाश एवं पृथ्वी को पुष्प , पंच गंध, या अष्टगंध का भी प्रयोग कर सकते हैं ,अर्पण करना चाहिए । अर्थात इन सभी देशों में दिए हुए क्रम से रोली चावल से युक्त पुष्प दिशाओं में क्रम से प्रक्षेपित या फेंकना चाहिए।
       दही और भात , सभी दिशाओं के लिए प्रसाद स्वरूप अर्पण करना चाहिए। इसमें 10 बत्ती 0का दीपक हो।
एक उर्धव मुखी अर्थात ऊपर की ओर तथा 8 बत्तियां दीपक में होना चाहिए क्योंकि आकाश तत्व के लिए उर्धव मुखी एवं शेष अन्य दिशाओं के लिए आठ बत्ती यह विभिन्न रंगों की होना चाहिए ।एक पृथ्वी के लिए है। 
         इसके लिए सबसे उत्तम है दीपक बत्ती के लिए , रुई के स्थान पर,मौली या कलावे का प्रयोग किया जावे ।जिसमें नीला पीला हरा आदि रंग भी रहते हैं ।
         गाय का घी दीपक के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इसके बाद महुआ  या तिल के तेल का प्रयोग किया जा सकता है ।गाय के घी के पश्चात दूसरा स्थान तिल के तेल का है ।
     दीपक प्रज्वलन व पूजा संक्षिप्त विधि।
       इसके लिए विशेष समय प्रातः 7:41 तक, मध्य समय 11:45 से 12:20 तक एवं साईं काल 5 48 6:30 तक है ।
      इन तीनों समय में यदि हम दीपक का प्रयोग करते हैं तो अति श्रेष्ठ है, अन्यथा प्रातः या सायं काल  एक बार 9 बत्तियों  के दीपक अवश्य प्रयोग किया जावे ।
सर्वा भवत्य: सिद्धयंतु मम जन्मनि जन्मनि ।     
इस प्रकार से दीपक जलाते समय प्रज्वलित करते समय यह प्रार्थना करना चाहिए ।
         सर्व सिद्धिम सर्व सफलता देही मे नमः। मंत्र के पूर्व एवम पश्चात कहे।
       अर्ध रात्रि में दही और भात का भोजन किए जाने का विधान है । लगभग 11:42 से रात्रि 12:40 तक भोजन करना सर्वश्रेष्ठ सिद्ध होगा।
      दिन में फल आहार, दूध ,दही वगैरह प्रयोग कर सकते हैं ।तैल की कोई वस्तु एवम नमक नही प्रयोग करे।
        इस दिक् पूजा से (वराह पुराण के अनुसार) सर्वत्र विजय प्राप्त होती है ,अर्थात व्यक्ति को दिग्विजय अर्थात सभी दिशाओं में सफलता तथा विजय प्राप्त होती है।
   
             राज्य प्राप्ति व्रत
(संदर्भ- विष्णु धर्मोत्तर पुराण)
  बेरोजगारों एवं  प्रतियोगिता में सफलता तथा पदोन्नति उच्च पद एवं अधिकार या राजनेताओं के लिए यह व्रत विशेष रुप से उपयोगी है।
     सुब्रत को किसी भी माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को किया जा सकता है परंतु सर्वाधिक प्रभावशाली दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि होती है इसमें 10 देवताओं के स्मरण, नमस्कार का महत्व है।
   भगवान केशव की आत्मा स्वरूप दस देव है। इनकी पूजा से राज्य, पद, अधिकार, प्रगति, सफलता मिलती है।
1 कृतु, 2दक्ष, 3वसु, 4सत्य, 5काम ,6मुनि,7काल, 8 करुवनमनुज, 9परशुराम 10विश्ववेदेव। आप सभी को मेरा नमस्कार।
    इनके सभी के नाम से गंध, पुष्प, अक्षत छोड़े। दीप एवम अन्न की मिठाई या भोग लगाए।
   ब्राहमण को पीतल, (स्वर्ण) केला, केसर, हल्दी, पीले वस्त्र मे से जो सामर्थ्य हो दान करे।