
PMO का नया नाम सेवा तीर्थ, केंद्रीय सचिवालय बना कर्तव्य भवन: उपनिवेशकालीन प्रतीकों से दूर नई प्रशासनिक सोच
भारत सरकार ने PMO का नाम ‘सेवा तीर्थ’, केंद्रीय सचिवालय का नाम ‘कर्तव्य भवन’ और राज्यों के ‘राजभवन’ का नाम ‘लोकभवन’ कर दिया है। यह बदलाव शासन की नई सोच—सेवा, कर्तव्य और जवाबदेही—का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री कार्यालय का नया नाम ‘सेवा तीर्थ’, केंद्रीय सचिवालय बना ‘कर्तव्य भवन’ — शासन की सोच में बड़े बदलाव का संदेश
भारत के प्रशासनिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब सेंट्रल सेक्रेटेरिएट को नया नाम ‘कर्तव्य भवन’ दिया गया है, जबकि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ नाम बदलने का अभियान नहीं है, बल्कि शासन की सोच को जनता की सेवा के केंद्र में लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सरकार का दावा है कि यह पूरा परिवर्तन सत्ता, नियंत्रण और उपनिवेशकालीन संकेतों से दूरी बनाकर सेवा, कर्तव्य और जवाबदेही की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।
2016 से शुरू हुआ बदलाव का सिलसिला
इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत 2016 में हुई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास का नाम 7, रेसकोर्स रोड से बदलकर 7, लोक कल्याण मार्ग कर दिया। इसके बाद नाम परिवर्तनों की श्रृंखला जारी रही—
- 2022 में ‘राजपथ’ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ कर दिया गया।
- हाल ही में राजभवनों का नाम बदलकर ‘लोकभवन’ किया गया है।
- कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इसे लागू भी कर दिया है।
कौन-कौन से राज्य बदल चुके हैं नाम?
गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद जिन राज्यों ने ‘राजभवन’ की जगह ‘लोकभवन’ नाम अपनाया है, वे हैं—
- पश्चिम बंगाल
- तमिलनाडु
- केरल
- असम
- उत्तराखंड
- ओडिशा
- गुजरात
- त्रिपुरा
लद्दाख में राज निवास का नाम ‘लोक निवास’ कर दिया गया है।
अब राजस्थान भी इस सूची में शामिल हो गया है।
गृह मंत्रालय ने कहा है कि “राजभवन शब्द कॉलोनियलिज़्म का प्रतीक है, इसलिए इसे बदलना आवश्यक है।”
नई इमारत — ‘सेवा तीर्थ’ और ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’
नई PMO बिल्डिंग, जिसे पहले सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ कहा जाता था, अब जल्द ही “सेवा तीर्थ” के रूप में जानी जाएगी।
यह परिसर न सिर्फ PMO बल्कि इन कार्यालयों को भी समेटेगा—
- कैबिनेट सेक्रेटेरिएट
- नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट
- इंडिया हाउस (हाई-लेवल ग्लोबल मीटिंग्स के लिए)
अधिकारियों के अनुसार, यह नया परिसर एक ऐसे आधुनिक वर्कप्लेस की तरह तैयार किया गया है जहां सेवा की भावना और राष्ट्रीय प्राथमिकताएँ आकार लेंगी।
सरकार का बड़ा संदेश
बीते एक दशक से प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सार्वजनिक पदों की छवि और भावना को बदलने की प्रक्रिया जारी है। नाम परिवर्तन उसी व्यापक अभियान का हिस्सा है जिसका लक्ष्य है—
- उपनिवेशकालीन प्रतीकों से मुक्ति
- जनता के प्रति उत्तरदायित्व पर जोर
- सत्ता की जगह सेवा का संदेश
- शासन की कार्यशैली में पारदर्शिता
केंद्रीय सचिवालय = ‘कर्तव्य भवन’
केंद्रीय सचिवालय का नया नाम कर्तव्य भवन न सिर्फ प्रशासनिक बदलाव है, बल्कि यह शासन की नई दिशा को दर्शाता है—
जहां कर्तव्य, सेवा, और जनहित सर्वोपरि हों।









