Advertisement

Ambikapur News : शहीदे-आज़म चन्द्रशेखर आज़ाद की पुण्यतिथि पर मानव कल्याण एवं सामाजिक विकास संगठन की काव्यगोष्ठी…….

शहीदे-आज़म चन्द्रषेखर आज़ाद की पुण्यतिथि पर मानव कल्याण एवं सामाजिक विकास संगठन की काव्यगोष्ठी…….

P.S.YADAV/ब्यूरो चीफ/सरगुजा// भारतीय स्वंतत्रता-संग्राम के महान् योद्धा चन्द्रषेखर आज़ाद की पुण्यतिथि पर मानव कल्याण एवं सामाजिक विकास संगठन, सरगुजा द्वारा देषभक्तिपूर्ण काव्यगोष्ठी का आयोजन आषा पाण्डेय के निवास पर वरिष्ठ गीतकार रंजीत सारथी की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में मां सरस्वती के छायाचित्र पर सुमन समर्पित किए गए। तत्पष्चात् संगठन के प्रदेष अध्यक्ष डॉ0 उमेष पाण्डेय ने कहा कि चन्द्रषेखर आज़ाद भारत मां के एक महान वीर सपूत थे। उन्होंने भारत के स्वाधीनता-संग्राम में अप्रतिम योगदान दिया और देष के लिए अपना सर्वस्व बलिदान किया। उन्होंने उत्तर भारत में क्रांतिकारी गतिविधियों के सक्रिय संचालन के लिए ‘हिन्दुस्तान सोषलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी’ नामक संगठन की स्थापना की।

17 दिसम्बर, 1928 को अपने वीर साथियों- भगत सिंह और राजगुरु के साथ लाला लाजपतराय की मृत्यु का बदला अंग्रेज पुलिस अधीक्षक जेपी सांडर्स की हत्या करके लिया। अंग्रेजों के काले कानूनों के विरोधस्वरूप दिल्ली की केन्द्रीय असेम्बली में बम विस्फोट करवाया। 27 फरवरी, 1931 को इलाहाबाद के अल्फेेड पार्क में अंग्रेज सिपाहियों से लोहा लेते हुए उन्होंने खुद को गोली मारकर वीरगति प्राप्त की। आज़ाद जीवन भर आज़ाद ही रहे। उन्हें अंग्रेज़ जीवित हालत में कभी पकड़ नहीं सके। गीतकार पूनम दुबे का कहना था कि चन्द्रषेखर आजा़द पर हर भारतीय को गर्व है और हमेषा रहेगा। उन्होंने भारत-भूमि को प्राणों से प्यारी बताते हुए एक प्रेरक गीत की भी प्रस्तुति दी- कर्म ऐसा कीजिए कि जीने की पहचान हो, मातृभूमि जान से प्यारी, दिल में हिन्दुस्तान हो। माधुरी जायसवाल ने अपनी रचना में राष्ट्रभक्त नागरिकों के साहस को सलाम किया – काया में देषभक्ति का प्रवाह बहेगा, साहस से साजिषों का हरेक दुर्ग ढहेगा।

WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.16.05
WhatsApp Image 2026-08-15 at 00.21.47

जब तक एक भी जवान सरहद पे है खड़ा, ये हिन्द आज़ाद है, आजा़द ही रहेगा। अर्चना पाठक ने देष के वीर सैनिक के जज़्बे और हौसले को उसी की जु़बान में इज़हार किया – तिरंगा बना है कफ़न साथियों, इतनी जल्दी करो न दफ़न साथियों। सैनिक हूं देष को बचाऊंगा, दुष्मनों के छक्के भी छुड़ाऊंगा। कवयित्री मंषा शुक्ला ने अपने गीत में वीर सैनिक की बलिदानी भावना का स्वर मुखरित कर, सबका हृदय द्रवित कर दिया – गर्व भरा मुखमंडल लेकर भाव गर्व का लिए हुए, लिपट तिरंगे में जब आऊं, मां करना मेरा अभिनंदन। तन-मन हो समर्पित मेरा मातृभूमि की रक्षा में। चुका सकूं कर्ज़ मातृभूमि का जब तक तन में प्राण रहे। हंसते-हंसते चढ़ जाऊं बलि, क्षोभ न मिटने का करना। कार्यक्रम में आषा पाण्डेय ने अंग्रेजों के छल-कपट और कायरतापूर्ण, बर्बर कार्यवाहियों का भी ज़िक्र किया कि कैसे अंग्रेजों ने अनेक भारतीय वीरों की हत्या धोखे से करवाई- कैसे बताऊं वीर शहीदों की उस दुख भरी गाथा को, जहां कायरों ने धोखे से पीठ पर भोंका छुरे को। भारत मां के वीर लालों को तनिक न इसका भान था।

मानवता को शर्मसार कर गद्दारों ने किया आघात था। राजलक्ष्मी पाण्डेय ने झण्डा-वंदन किया – ऐ भारत के दुष्मन, ये बात समझ ले तू – हर हिन्दुस्तानी में है जान तिरंगे की, रौषन सूरज-सी है पहचान तिरंगे की। मुकुन्दलाल साहू ने भी अनेक देषभक्तिपूर्ण दोहे सुनाए- माटी की इज़्ज़त करो, माटी का सम्मान। इसकी खा़ातिर मिट गए, कितने वीर जवान। प्राणों को जिनने दिया, आजा़दी के नाम। अमरदीप हैं आज वे, उनको करें प्रणाम। अंत में, मधुर कण्ठ के धनी वरिष्ठ गीतकार रंजीत सारथी ने भारत माता की वंदना में प्रेरणादायी सरगुजिहा गीत की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम का यादगार समापन किया- ऐ भूईयां हर दाई हवे ऐला करो परनाम गा। दुनिया मा सुग्घर हवे हमर हिन्दुस्तान गा। इहां जनमिन रिसी-मुनी, गंगा-जमुना करथे गान गा। दुनिया मा कहावत हवे भारत हमर महान् गा। कार्यक्रम का काव्यमय संचालन अर्चना पाठक और आभार आषा पाण्डेय ने जताया।

ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM