वायरस संक्रमण : क्या नाइट कर्फ्यू लगाने से नहीं फैलता कोरोना? इन चार पॉइंट्स में जानिए अपने सवालों के जवाब, रायपुर एसएसपी, अजय यादव ने दिये यह तर्क

वायरस संक्रमण : क्या नाइट कर्फ्यू लगाने से नहीं फैलता कोरोना? इन चार पॉइंट्स में जानिए अपने सवालों के जवाब, रायपुर एसएसपी, अजय यादव ने दिये यह तर्क

वायरस संक्रमण : क्या नाइट कर्फ्यू लगाने से नहीं फैलता कोरोना? इन चार पॉइंट्स में जानिए अपने सवालों के जवाब, रायपुर एसएसपी, अजय यादव ने दिये यह तर्क

राजधानी रायपुर सहित कई जिलों में नाइट कर्फ्यू चल रहा है। राज्य के बहुत से शहरों में लगातार नाइट कर्फ्यू लगाया जा रहा है। यह पहला मौका नहीं है जब कोविड के दौरान नाइट कर्फ्यू का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पहले भी कई बार नाइट कर्फ्यू लगते रहे हैं। लोग अकसर सवाल पूछते हैं कि रात में कर्फ्यू लगाने का क्या औचित्य है?

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रात को लगाए जाने वाले कर्फ्यू से बहुत हद तक इस वक्त कोरोना जैसी गंभीर खतरनाक बीमारी से एक बहुत बड़ी आबादी को संक्रमित होने से बचाया जाता है। हम आपको इन चार पॉइंट से बताते हैं कि नाइट कर्फ्यू कितना कारगर होता है…

नाइट लाइफ पर पूरी तरीके से लग जाता है अंकुश

देश के सभी बड़े शहरों से लेकर के प्रदेश की राजधानी और छोटे जिलों तक में नाइट लाइफ बहुत ज्यादा प्रचलन में है। बड़े होटल और पब, बार आदि जगहों पर देर रात तक लोग नाइट लाइफ का लुत्फ उठाते हैं। शहर और राजधानी से लेकर मेट्रो सिटीज में रात को भीड़ इकट्ठा होती है। जिन जगहों पर नाइट कर्फ्यू लगाया जाता है, वहां पर यह सारे कार्यक्रम और आयोजन रद्द हो जाते हैं। इसका मतलब इन जगहों पर लोगों को आने से नाइट कर्फ्यू रोकता है और उन्हें कोरोना वायरस जैसी गंभीर बीमारी के संक्रमण से बचाता है। इस लिहाज से नाइट लाइफ में नाइट कर्फ्यू बेहद कारगर है।

रात में बस अड्डों से लेकर रेलवे स्टेशन के बाहर भीड़ न हो

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देश की राजधानी से लेकर जिलों से लेकर शहर तहसील और कस्बों में ही बहुत सारे ऐसे ठिकाने होते हैं जहां पर पूरी रात गुलजार होती है। ऐसे ठिकानों पर पूरे देश में करोड़ों लोग अलग-अलग जगहों पर एकत्र होते हैं और कोरोना जैसी गंभीर बीमारी के दौरान ये संक्रमण का शिकार भी हो सकते हैं और लोगों को संक्रमित भी कर सकते हैं। इन जगहों में बस अड्डों से लेकर रेलवे स्टेशन और नाइट फूड स्ट्रीट समेत तमाम सार्वजनिक जगहों पर भी रातों को भीड़ इकट्ठा होती है। नाइट कर्फ्यू के दौरान संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करता है कि इन जगहों पर कोई भी आदमी ना पहुंचे और न ही इकट्ठा हो।

रात्रि गतिविधियों पर रहती है पुलिस की नजर

एक सामान्य नागरिक की नजरों से देखा जाए तो उसका यह सवाल लाजिमी है कि रात का कर्फ्यू क्यों लगता है। दरअसल देश की एक बहुत बड़ी आबादी का हिस्सा सुबह उठकर दिन भर काम करता है और शाम होने के बाद रात को अपने घर में चैन की नींद सोता है। लेकिन देश की आबादी का एक तबका ऐसा भी है जो रात को जागता है तमाम तरह की व्यापारिक गतिविधियों में शामिल होकर भीड़भाड़ को इकट्ठा करता है। नाइट कर्फ्यू में इस तरीके की सभी गतिविधियां पूरी तरीके से बंद हो जाती हैं। पुलिस से लेकर प्रशासन और अन्य जिम्मेदार अधिकारी इस पर नजर रखते हैं।

नाइट कर्फ्यू में सड़कों पर फर्राटा भरने की अनुमति नहीं

दिल्ली, मुंबई या किसी भी बड़े शहर की सड़कों पर अकसर रात को आप देखते होंगे कि बहुत सारी गाड़ियां फर्राटा भरते हुए नजर आती हैं। नाइट कर्फ्यू के दौरान सड़कों पर निकलना पूरी तरीके से प्रतिबंधित कर दिया जाता है। सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं को ही अनुमति मिलती है, ऐसे में रात को नाइट आउट की अनुमति नहीं दी जाती है। नाइट कर्फ्यू के कॉन्सेप्ट में यह बात स्पष्ट है कि लोगों को जो जहां है उसे वहीं पर रोक दिया जाए यानी उसे मौजूदा जगह से बाहर निकलने की अनुमति न दी जाए। ऐसा करके किसी भी घटना या किसी गंभीर बीमारी को रोका जा सकता है.

रायपुर के एसएसपी, आइपीएस अजय यादव कहते हैं, किसी घटना या किसी विवाद को रोकने के लिए नाइट कर्फ्यू लगाया जाता है। वह बताते हैं जिन जगहों पर नाइट कर्फ्यू लगाते हैं वहां पर रात्रि गतिविधियों को पूरी तरीके से रोकने के इंतजाम किए जाते हैं। इसके लिए पुलिस और प्रशासन महकमा हमेशा अलर्ट रहता है कि नाइट कर्फ्यू का कहीं कोई उल्लंघन ना हो। नाइट कर्फ्यू, दिन में लगाए जाने वाले कर्फ्यू की तरह ही काम करता है।