सरकारी फरमान से तकरार: सीएम राहत कोष में पुलिसकर्मियों ने एक दिवसीय वेतन कटवाने से किया इनकार..

कोरबा :- छत्तीसगढ़ में कोरोना की सुनामी थमने का नाम नहीं ले रही है. कोरोना की सुनामी से सरकार भी हफ्फ खाती नजर आ रही है. बावजूद इसके भूपेश सरकार लगातार कोशिश कर रही है. मरीजों को सुविधाएं पहुंचाने में जुटी है. इसी बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देने के लिए आदेश जारी किया है, जिसे बड़ी तादाद में पुलिसकर्मियों ने देने से इनकार कर दिया है ।

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दरअसल, कोरबा जिले के अलग-अलग थाने क्षेत्र में पुलिसकर्मियों ने भारी मात्रा में मुख्यमंत्री राहत कोष में एक दिन का वेतन देने से इनकार किया है. सूची में 150 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के नाम शामिल हैं. ये सूची अब तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. जिसमें सीधे लिखा है कि हम मुख्यमंत्री सहायता कोष में एक दिन की सैलरी नहीं देंगे।

राहत कोष में पैसे से देने से असहमत..
एक सूची में पुलिसकर्मियों ने कोरबा पुलिस अधीक्षक को मुख्यमंत्री राहत कोष में 1 दिवस का वेतन नहीं काटने के संबंध में आवेदन लिखा है, जिसमें साफ तौर से कहा कि वेतन नहीं काटा जाए. 1 दिवस का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करने से हम असहमति जता रहे हैं.

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बाबू’ की गलती की वजह से सूची गलत बन गई…
मामले में लल्लूराम डॉट कॉम ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि ये सूची फेक है. पहले पुलिसकर्मियों से मुख्यमंत्री राहत कोष में एक दिन का वेतन देने के लिए नॉर्मल जानकारी मांगी गई थी, जिसमें कुछ लोगों ने पहले असहमति जताई और कुछ लोगों ने सहमति दी. इसी की सूची तैयार की गई थी, लेकिन ‘बाबू’ की गलती की वजह से सूची गलत बन गई, जो वायरल हो रही है.

बहुत कुछ कह रहीं वायरल सूचियां…
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने बाद में मुख्यमंत्री राहत कोष में एक दिन का वेतन देने के लिए सहमति दी है. अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि भारी तादाद में पुलिसकर्मियों ने इनकार किया है, तो क्या उनपर दबाव बनाया गया या फिर सच में पुलिसकर्मी राहत कोष में सहायता करने के लिए मान गए.कई तरह के सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सूचियां जो वायरल हो रही हैं, वह बहुत कुछ कह रही हैं।

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