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आजादी गौरव यात्रा के माध्यम से देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों व वीर जवानों की गाथा को जन जन तक पहुँचा रहे हैं:विकास उपाध्याय

आजादी गौरव यात्रा के माध्यम से देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों व वीर जवानों की गाथा को जन जन तक पहुँचा रहे हैं:विकास उपाध्याय

रायपुर: रायपुर पश्चिम विधानसभा के ख़मतराई और गुढ़ियारी के विभिन्न क्षेत्रों मे आज आज़ादी के 75वीं वर्षगाँठ पर आज़ादी की गौरव यात्रा विधायक विकास उपाध्याय द्वारा आयोजित की गई। विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि आज़ादी गौरव यात्रा के माध्यम से देश की आज़ादी के लिए शहीद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और वीर जवानों की गाथा को जन-जन तक पहुँचाना ही हमारा उद्देश्य है। विकास उपाध्याय ने कहा कि सैंकड़ों वर्षों तक अंग्रेजों ने भारत पर राज किया और लाखों हिन्दुस्तानियों का नरसंहार किया। भारत की स्वतंत्रता के लिये अंग्रेजों के विरुद्ध आन्दोलन दो प्रकार का था, एक अहिंसक आन्दोलन एवं दूसरा सशस्त्र क्रान्तिकारी आन्दोलन। भारत की आज़ादी के लिए 1857 से 1947 के बीच जितने भी प्रयत्न हुए, उनमें स्वतंत्रता का सपना संजोये क्रान्तिकारियों और शहीदों की उपस्थित सबसे अधिक प्रेरणादायी सिद्ध हुई। वस्तुतः भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग है। भारत की धरती के जितनी भक्ति और मातृ-भावना उस युग में थी, उतनी कभी नहीं रही। मातृभूमि की सेवा और उसके लिए मर-मिटने की जो भावना उस समय थी, आज उसका नितान्त अभाव हो गया है।

भारत को मुक्त कराने के लिए सशस्त्र विद्रोह की एक अखण्ड परम्परा रही है। भारत में अंग्रेज़ी राज्य की स्थापना के साथ ही सशस्त्र विद्रोह का आरम्भ हो गया था। बंगाल में सैनिक-विद्रोह, चुआड़ विद्रोह, सन्यासी विद्रोह, संथाल विद्रोह अनेक सशस्त्र विद्रोहों की परिणति सत्तावन के विद्रोह के रूप में हुई। प्रथम स्वातन्त्र्यदृसंघर्ष के असफल हो जाने पर भी विद्रोह की अग्नि ठण्डी नहीं हुई। शीघ्र ही दस-पन्द्रह वर्षों के बाद पंजाब में कूका विद्रोह व महाराष्ट्र में वासुदेव बलवन्त फड़के के छापामार युद्ध शुरू हो गए। संयुक्त प्रान्त में पं॰ गेंदालाल दीक्षित ने शिवाजी समिति और मातृदेवी नामक संस्था की स्थापना की। बंगाल में क्रान्ति की अग्नि सतत जलती रही। सरदार अजीत सिंह ने सत्तावन के स्वतंत्रतादृआन्दोलन की पुनरावृत्ति के प्रयत्न शुरू कर दिए। रासबिहारी बोस और शचीन्द्रनाथ सान्याल ने बंगाल, बिहार, दिल्ली, राजपुताना, संयुक्त प्रान्त व पंजाब से लेकर पेशावर तक की सभी छावनियों में प्रवेश कर 1915 में पुनः विद्रोह की सारी तैयारी कर ली थी। दुर्दैव से यह प्रयत्न भी असफल हो गया। इसके भी नए-नए क्रान्तिकारी उभरते रहे। राजा महेन्द्र प्रताप और उनके साथियों ने तो अफगान प्रदेश में अस्थायी व समान्तर सरकार स्थापित कर ली। सैन्य संगठन कर ब्रिटिश भारत से युद्ध भी किया। रासबिहारी बोस ने जापान में आज़ाद हिन्द फौज के लिए अनुकूल भूमिका बनाई।

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मलाया व सिंगापुर में आज़ाद हिन्द फौज संगठित हुई। सुभाष चन्द्र बोस ने इसी कार्य को आगे बढ़ाया। उन्होंने भारतभूमि पर अपना झण्डा गाड़ा। आज़ाद हिन्द फौज का भारत में भव्य स्वागत हुआ, उसने भारत की ब्रिटिश फौज की आँखें खोल दीं। भारतीयों का नाविक विद्रोह तो ब्रिटिश शासन पर अन्तिम प्रहार था। अंग्रेज़, मुट्ठी-भर गोरे सैनिकों के बल पर नहीं, बल्कि भारतीयों की फौज के बल पर शासन कर रहे थे। आरम्भिक सशस्त्र विद्रोह में क्रान्तिकारियों को भारतीय जनता की सहानुभूति प्राप्त नहीं थी। वे अपने संगठन व कार्यक्रम गुप्त रखते थे। अंग्रेज़ी शासन द्वारा शोषित जनता में उनका प्रचार नहीं था। अंग्रेजों के क्रूर व अत्याचारपूर्ण अमानवीय व्यवहारों से ही उन्हें इनके विषय में जानकारी मिली। विशेषतः काकोरी काण्ड के अभियुक्त तथा भगतसिंह और उसके साथियों ने जनता का प्रेम व सहानुभूति अर्जित की। भगतसिंह ने अपना बलिदान क्रांति के उद्देश्य के प्रचार के लिए ही किया था। जनता में जागृति लाने का कार्य महात्मा गांधी के चुम्बकीय व्यक्तित्व ने किया। बंगाल की सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी श्रीमती कमला दासगुप्त ने कहा कि क्रांतिकारी की निधि थी “कम व्यक्ति अधिकतम बलिदान“, महात्मा गांधी की निधि थी “अधिकतम व्यक्ति न्यूनतम बलिदान“। सन् 42 के बाद उन्होंने अधिकतम व्यक्ति तथा अधिकतम बलिदान का मंत्र दिया। भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति में क्रांतिकारियों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है।

पश्चिम विधानसभा में आज गौरव यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और विभिन्न स्थानों पर इस यात्रा का स्वागत भी किया गया भारत माता की जय और वीर शहीदों के जयकारों से आज पश्चिम विधानसभा गुंजता नजर आया आजादी के 75वे वर्षगाँठ पर काँग्रेस पार्टी की गौरव यात्रा रायपुर पश्चिम विधानसभा में पदयात्रा के माध्यम से आयोजित जिसमे मुख्य रूप से क्षेत्र के विधायक विकास उपाध्याय, शहर जिला काँग्रेस अध्यक्ष गिरीश दुबे, योग आयोग के अध्यक्ष ज्ञानेश शर्मा, महेश शर्मा, वरिष्ठ पार्षद कुमार मेनन, शिव सिंह ठाकुर, सुंदर जोगी, अन्नू राम साहू, वारेंद्र साहू, दाऊलाल साहू, अशोक ठाकुर, देवकुमार साहू, आशुतोष मिश्रा, रवि राव, डेमेन्द्र यदु, तरूण श्रीवास, रानी वर्मा, पूजा देवांगन, सुधा सिन्हा, दर्शन कौर, प्रकाश मानिकपुरी, रंजीत बिन्द्रा, कुन्दन सिन्हा, ईश्वर भगत, योगेश दीक्षित, विकास अग्रवाल, राकेश यादव, विकास वर्मा, शान्तनू झा, विनोद कश्यप, राजू चक्रधारी, प्रमोद कुमार (टार्जन), जाफर खोखर, सोनू ठाकुर, दिलीप गुप्ता, रितेश साहू, रेखा शुक्ला, भीम यादव, प्रदीप शर्मा, पी. शीनू, अरूण सारंग एवं क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेसियो के साथ क्षेत्र के सम्मानित कार्यकर्ता मौजूद थे।

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