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कांग्रेस की टीम ने हसदेव अरण्य क्षेत्र में किये जंगल की कटाई और खदान क्षेत्र का निरीक्षण किया।

कांग्रेस की टीम ने हसदेव अरण्य क्षेत्र में किये जंगल की कटाई और खदान क्षेत्र का निरीक्षण किया।

अम्बिकापुर/ हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खदानों के लिए वनों की कटाई और ग्रामीण आदिवासियों के साथ अत्याचार के मामलों की जांच के लिए गठित कांग्रेस की टीम ने आज प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। पूर्व मंत्री डॉ प्रेम साय सिंह की अगुवाई में जांच टीम ने साल्ही, हरिहरपुर,घाटबर्रा और फतेहपुर के लोगों से बात की

जांच टीम को ग्रामीणों ने बताया प्रभावित गांव के लोग अपनी जमीन नहीं देने के लिए प्रतिबद्ध है।वे पिछले 675 दिन से जंगल और जमीन बचाने के लिए हरिहरपुर और घाटबर्रा गांव में धरना दे रहे हैं।ग्राम हरिहरपुर में धरने पर बैठे ग्रामीणों के प्रतिनिधियों रामलाल करियाम साल्ही,इंद्र कुंवर मदनपुर,उमेश्वर साल्ही, सम्पतिया हरिहरपुर ने ग्रामीणों की ओर से एक स्वर से कहा हसदेव अरण्य क्षेत्र की सभी 23 प्रस्तावित कोयला खदानों को निरस्त किया जाए।

परसा खदान के लिए ग्रामीणों की सहमति नहीं है।27 जनवरी 2018 को वन अधिकार पट्टा के लिए ग्राम सभा की बैठक हुई थी।ग्राम सभा के प्रस्ताव में 1 से 21 तक खदान का कोई जिक्र नहीं हुआ। ग्रामसभा की समाप्ति के बाद उदयपुर के रेस्ट हाउस में तत्कालीन कलेक्टर और पुलिस के अधिकारियों ने सरपंच /सचिव पर दबाव बनाकर अलग से क्रमांक 22 में खदान के लिए सहमति का एजेंडा लिखकर हस्ताक्षर करा लिया। फर्जी ग्रामसभा के प्रस्ताव के सम्बंध में उदयपुर थाना से लेकर महामहिम राज्यपाल महोदय तक शिकायत की जा चुकी है।अभी तक जांच नहीं हुई है।

घाटबर्रा में सामुदायिक वन अधिकार का पट्टा मिला था ,उसे निरस्त कर दिया।मामला न्यायालय में विचाराधीन है। यहां वनों की कटाई को लेकर विशेष ग्राम सभा हुआ था। ग्रामीणों के विरोध के चलते उसे निरस्त कर दिया गया।आरोप है कि बाद में घर-घर रजिस्टर घुमाकर हस्ताक्षर कराया गया। घाट बर्रा के अधिकांश लोगों ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया तो फर्जी हस्ताक्षर कराया गया। कृष्णा प्रसाद ने आरोप लगाया उसके धनीराम आत्मज संतराम की मृत्यु 15-16 साल पहले हो चुकी है।उनका भी हस्ताक्षर रजिस्टर में है। ऐसे कई नाम है जिनकी मृत्यु ग्रामसभा से पहले हो चुकी है लेकिन कार्यवाही पंजी में उनके दस्तखत है ।

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जांच टीम के संयोजक पूर्व मंत्री डॉ प्रेम साय सिंह ने ग्रामीणों के हवाले से बताया नया खुलने वाले परसा खदान के लिए वनों की कटाई की स्वीकृति मिलने की बात कंपनी के लोग कहते हैं हालांकि संबंधित कागज कभी नहीं दिखाया गया,इसे लेकर ग्रामीणों में संशय की स्थिति है। ग्रामीण जन डरे हुए हैं उन्हें लगता है अदानी कंपनी प्रशासन के साथ मिलकर कभी भी जंगल की कटाई शुरू कर सकती है। एक अनुमान के मुताबिक परसा और केते एक्सटेंशन खदान के लिए कुल 9 लाख से अधिक पेड़ काटे जाएंगे।

कांग्रेस की टीम ने हाल में किये जंगल की कटाई और खदान क्षेत्र का निरीक्षण किया। टीम को ग्रामीणों ने दिखया किस तरह अडानी कम्पनी बारहमासी छोटी नदियों को डाइवर्ट कर उनका अस्तित्व खत्म कर रही है।कांग्रेस की जांच टीम के सदस्य पूर्व विधायक डॉ प्रीतम राम ,गुलाब कमरो, श्रम कल्याण मंडल के पूर्व अध्यक्ष शफी अहमद, अजजा आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह,जिला कांग्रेस सरगुजा के अध्यक्ष राकेश गुप्ता, सूरजपुर अध्यक्ष भगवती राजवाड़े,राजनाथ सिंह ने प्रभावितों के बयान के के हवाले से बताया वनों की कटाई के लिए पुलिस और प्रशासन के साथ अदानी कंपनी के अधिकारियों द्वारा दबाव बनाए जाने से ग्रामीणों मैं आक्रोश उपज रहा है जो कभी भी हिंसक रूप ले सकता है ग्रामीणों के मुताबिक 21 दिसंबर को पेंड कटाई से ठीक पहले राम लाल,ठाकुर राम, जयनंदन श्रीपाल पोर्ते, शिव प्रसाद कुसरो को भोर होने से पहले ही सादी वर्दी में हथियार से लैस पुलिसवालों ने घरों को घेर कर उठा लिया।जयनंदन के घर का दरवाजा तोड़ दिए। रामलाल को कपड़ा तक नहीं पहनने दिया।गांव के पक्के कच्चे सभी रास्तो तक मे पुलिस का पहरा लगा कर तीन दिन में ही करीब 30 हजार बड़े छोटे पेंडो को इलेक्ट्रॉनिक आरा मशीन से काट दिया।जब पेंड काटना होता है आंदोलन के मुखिया लोगो को नजरबंद कर देते हसीन ।ग्रामीणों को धरना स्थल में जुटने नहीं देते। मारपीट और धमकी आम बात है। लगातार प्रताड़ना से ग्रामीणों के अंदर आक्रोश पनप रहा है।यदि प्रशासनिक तंत्र और कम्पनी का रवैया नहीं बदला तो जल,जंगल और जमीन को बचाने के लिए कभी भी उग्र हो सकते गई। इस दौरान विनयशर्मा बंटी, ओमप्रकाश सिंह, आशीष वर्मा,रामचन्द्र यादव,राजू सिंह, दिनेश शर्मा, धर्मेंद्र सिंह सहित अन्य मौजूद थे।

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