कोरबा: एसपी का ईनाम पाने मुखबिरों को रुचि नहीं, देवेन्द्र पाण्डेय की तलाश अब तक अधूरी..

कोरबा: एसपी का ईनाम पाने मुखबिरों को रुचि नहीं, देवेन्द्र पाण्डेय की तलाश अब तक अधूरी..

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कोरबा :- भाजपा के बड़े नेताओं में शुमार देवेन्द्र पाण्डेय की तलाश अब तक अधूरी है। षड़यंत्रपूर्वक कूटरचना, धोखाधड़ी और अमानत में खयानत के एक मामले में धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120 बी व 34 भादवि के तहत देवेन्द्र पाण्डेय पर अपराध उरगा थाना में दर्ज है। वर्ष 2012 में दर्ज हुए इस मामले में लगभग 10 साल बाद एकाएक खलबली मची और उनकी तलाश शुरू हुई। पुलिस द्वारा उनके आवास सहित दफ्तर व अन्य स्थानों पर दबिश दी गई किंतु वे कहीं नहीं मिले।

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अंतत: 29 जनवरी 2021 को पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा ने एक उद्घोषणा कर ऐसी महत्वपूर्ण सूचना जिसमें देवेन्द्र पाण्डेय की गिरफ्तारी हो सके, सूचना देने वाले उक्त व्यक्ति को 5 हजार रुपए नगद राशि से पुरस्कृत करने का ऐलान किया है। 5 हजार का ईनाम भाजपा नेता के सिर पर घोषित होने के एक माह बाद भी किसी भी तरह की जानकारी अब तक पुलिस के हाथ नहीं लग सकी है और न ही मुखबिर तंत्र इनके बारे में कोई सुराग अथवा जानकारी हासिल कर सका है। इसे लेकर नगर में चर्चा भी गर्म है कि आखिर एसपी के घोषित ईनाम को प्राप्त करने के लिए मुखबिर कोई रुचि क्यों नहीं दिखा रहे? क्या एसपी के ईनाम पर श्री पाण्डेय का अघोषित ईनाम भारी पड़ गया है या फिर किसी न किसी तरह से खोजबीन को ठंडे बस्ते में डालकर अभयदान दिया जा रहा है। बता दें कि पुलिस अधीक्षक ने अपने उद्घोषणा में स्पष्ट किया है कि देवेन्द्र पाण्डेय काफी समय से फरार हैं जिसकी गिरफ्तारी के लिए हर संभावित स्थान पर दबिश दी जा रही है। सवाल जायज है कि इस फर्जीवाड़े का जिन्न वर्षों बाद उजागर होने से पहले तक देवेन्द्र पाण्डेय शहर में ही मौजूद रहे और विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के साथ अपने प्रतिष्ठान पर भी आते-जाते रहे। रामपुर विधायक ननकीराम कंवर के साथ हुई तल्ख्यिों और शिकायत के बाद रिश्तों में कड़वाहट आई, तब जाकर शासन और पुलिस को इस पुराने धूल जमे मामले की याद आई। देखना है कि देवेन्द्र पाण्डेय के अघोषित ईनाम पर एसपी का ईनाम भारी पड़ता है या पुलिस का सूचना तंत्र/मुखबिरी?

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