
समाज में हो रहे महिलाओ पर जुल्म एवम अत्याचार पर महिलाएं आत्मनिर्भर बने ..तारा अधिकारी
आज के दिन में हजारों बहुओं को ससुराल में रिश्तेदार से बात करने पर घृणा की नजर से देखा जाता है और छोटी-छोटी बातों पर शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया जाता हैं जिसके कारण बहू-बेटी स्वयं आत्महत्या जैसे बुरे विचार अपने मन में लाती है या फिर इसकी शिकार हो जाती हैं इसकी जिम्मेदारी किसकी है?ऐसे ससुराल पक्ष का क्या करे?
आज कल लड़किया अपने पैरो में खड़े होकर समाज को यह दिखाना चाहती है की हम बेवश या लाचार नही है हमारे में भी आत्म निर्भर बनने की क्षमता है अगर हमारी गलती नहीं होगी तो हम क्यों झुके हम लड़ना जानते है लड़किया है इसका मतलब ये नही की हम चुप चाप हर चीज को बर्दास्त करते रहे
आज के दिनों में सरकार भी लड़किया के साथ है अधिकतर लड़कियां अपने अधिकार को समझ नही पाती जिससे वो हमेशा प्रताड़ित होते रहती है और अंत में आत्महत्या जैसे कदम उठाती है
मैं अंत में समाज के उन महिलाओं एवम लड़कियों को संदेश देना चाहती हू की अपने ऊपर हो रहे जुल्म को वे स्वय मुकाबला कर समाज में एक नई पहचान बनाए ना की कोई गलत कदम उठाए












