कोरोना काल के दौरान श्रम प्रवास किए लोगों में मोबाइल बैंकिंग के प्रति जागरूकता का अध्ययन कर रहे है शोधकर्ता

कोरोना काल के दौरान श्रम प्रवास किए लोगों में मोबाइल बैंकिंग के प्रति जागरूकता का अध्ययन कर रहे है शोधकर्ता

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बेमेतरा – कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय प्रवासी कामगारों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। पूरे विश्व में ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई कि लॉकडाउन जैसी स्थिति का लोगों को सामना करना पड़ा जिसमे कारखाने और कार्यस्थल बंद हो गए, लाखों प्रवासी श्रमिकों को आय की हानि, भोजन की कमी और अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता से जूझना पड़ा। इसके बाद, उनमें से कई और उनके परिवार भूखे रह गए। ऐसी भयावह वातावरण के कारण लोग बड़ी संख्या में अपने कर्म क्षेत्र से पलायन करके मूल निवास स्थान की ओर आने लगे चाहे सैकड़ो किलोमीटर की दूरी को या अन्य प्रदेश जाना हो सीमित यातायात व्यवस्था हो या पैदल हो वह अपने व अपने परिवार को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कर्म स्थान का त्याग किया। एक अध्ययन में पाया गया कि 43.3 मिलियन अंतरराज्यीय प्रवासी कोविड -19 की पहली लहर के दौरान लगाए गए लॉकडाउन के दौरान अपने घर लौट आए जिनमें से लगभग 35 मिलियन लोग पैदल घर चले गए या परिवहन के असामान्य साधनों का इस्तेमाल किया। जवाब में केंद्र और राज्य सरकारों ने उनकी मदद के लिए कई उपाय किए और बाद में उनके लिए परिवहन की व्यवस्था की। ऐसी स्थिति में छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी रायपुर एवं समाजशास्त्र एवं समाज कार्य अध्ययनशाला पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में कोविड -19 के बाद की अवधि में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण रणनीतियों में मोबाइल बैंकिंग को अपनाने के संबन्ध में परियोजना और जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कोविड – 19 के बाद श्रम प्रवास से प्रभावित क्षेत्रों में फोन पे/पेटीएम/कैशलेस सिएटल में समस्याओं एवं संभावनाओं की स्थिति का अध्ययन करना जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम की भूमिका को जाना जा सके। आम लोगों तक टेक्नोलॉजी के विस्तार में स्मार्टफोन की भूमिका और प्रकृति को जाना जा सके। यह कार्यक्रम प्रोजेक्ट इन्वेस्टिगेटर डॉ. एलएस गजपाल के मार्गदर्शन में बेमेतरा, राजनांदगांव, बलौदा बाजार, भाटापारा जिला में चलाया जा रहा हैं। इस कार्यक्रम में फील्ड इन्वेस्टिगेटर के रुप में दीपक साहू, विवेक ध्रुव एवं सहयोगी सुमित पटेल कार्यरत हैं।