जनपद पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष निर्वाचन हेतु संशोधित समय-सारणी जारी

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द्वितीय चरण में निर्वाचन की कार्यवाही 10 मार्च को निर्धारित, कलेक्टर ने दिए आवश्यक निर्देश

उत्तर बस्तर कांकेर, 04 मार्च 2025: उत्तर बस्तर कांकेर जिले में जनपद पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया में आंशिक संशोधन किया गया है। जिले के कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर द्वारा संशोधित समय-सारणी जारी की गई है, जिसमें निर्वाचन तिथियों में बदलाव करते हुए दो चरणों में चुनाव कराए जाने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले सभी जनपद पंचायतों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षों का निर्वाचन 04 मार्च को किया जाना था, लेकिन प्रशासनिक और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अब इसे दो चरणों में विभाजित कर दिया गया है।

संशोधित समय-सारणी अनुसार निर्वाचन प्रक्रिया

कलेक्टर कार्यालय (पंचायत) द्वारा जारी संशोधित समय-सारणी के अनुसार जिले की सात जनपद पंचायतों में एक ही दिन चुनाव कराना कानून व्यवस्था की दृष्टि से उचित नहीं था। इसलिए अब दो चरणों में निर्वाचन संपन्न कराया जाएगा।

🔹 प्रथम चरण: 04 मार्च 2025 को कांकेर, नरहरपुर, अंतागढ़ और कोयलीबेड़ा जनपद पंचायतों में निर्वाचन की कार्यवाही की जाएगी।🔹 द्वितीय चरण: 10 मार्च 2025 को चारामा, भानुप्रतापपुर और दूर्गूकोंदल में जनपद पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का निर्वाचन किया जाएगा।

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए समुचित व्यवस्थाएं करें और सुनिश्चित करें कि चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण वातावरण में हो।

निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण तिथियाँ

संशोधित समय-सारणी के अनुसार, जनपद पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष निर्वाचन हेतु निम्नलिखित तिथियाँ निर्धारित की गई हैं—

✔ 10 मार्च: सम्मिलन आयोजन, प्रकाशन अधिसूचना जारी करने तथा जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों को प्रथम सम्मिलन की सूचना देने की तिथि।✔ 12 मार्च: जनपद पंचायत के प्रथम विशेष सम्मिलन का आयोजन।

कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे उक्त तिथियों में आयोजित सम्मिलन की विधि सम्मत कार्यवाही पूर्ण कराने हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करें।

क्यों किया गया संशोधन?

प्रशासन द्वारा इस संशोधन को लेकर स्पष्ट किया गया है कि जिले की सभी जनपद पंचायतों में एक ही दिन चुनाव कराने से कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता था। साथ ही, एक ही दिन सभी जगह चुनाव कराने से प्रशासनिक मशीनरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता। इसी को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन प्रक्रिया को दो चरणों में विभाजित किया गया है। इससे प्रशासन को चुनाव कराने में सुविधा होगी और निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी समयानुसार कार्य करने का अवसर मिलेगा।

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प्रशासन की तैयारियाँ एवं सुरक्षा व्यवस्था

निर्वाचन प्रक्रिया को शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए हैं। संवेदनशील एवं अति संवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान कर वहां विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

✔ सभी मतदान केंद्रों पर पुलिस बल तैनात रहेगा।✔ संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाएगी।✔ निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन सतर्क रहेगा।✔ प्रत्याशियों एवं उनके समर्थकों को आचार संहिता का पालन करने हेतु दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

जनपद पंचायत चुनाव की महत्ता

जनपद पंचायत के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यह चुनाव न केवल पंचायतों की कार्यप्रणाली को संचालित करता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी एवं क्रियान्वयन की दिशा भी निर्धारित करता है।

जनपद पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के कर्तव्य एवं अधिकार महत्वपूर्ण होते हैं, जो निम्नलिखित हैं—🔹 ग्रामीण विकास योजनाओं का संचालन।🔹 पंचायत स्तर पर प्रशासनिक फैसले लेना।🔹 ग्रामीण समस्याओं का निराकरण।🔹 सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन।🔹 विकास कार्यों की मॉनिटरिंग।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

इस संशोधन के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी प्रतिक्रियाएँ दी हैं। कुछ दलों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे प्रशासनिक दृष्टि से उचित बताया है, जबकि कुछ विपक्षी दलों ने इसे सरकार की रणनीति करार दिया है।

🔹 सत्ताधारी दल: इस फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि इससे प्रशासन को बेहतर ढंग से चुनाव कराने का अवसर मिलेगा।
🔹 विपक्षी दल: कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि यह निर्णय सत्ता पक्ष के उम्मीदवारों को लाभ पहुँचाने के लिए लिया गया है।

जनता की राय

इस फैसले को लेकर ग्रामीण जनता की मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। कई ग्रामीण मतदाताओं का मानना है कि यह निर्णय आवश्यक था ताकि चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि पहले से घोषित तिथि पर चुनाव हो जाने से बेहतर होता।

उत्तर बस्तर कांकेर जिले में जनपद पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष निर्वाचन को लेकर संशोधित समय-सारणी जारी कर दी गई है। दो चरणों में चुनाव कराने का निर्णय प्रशासनिक एवं कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

प्रथम चरण में 04 मार्च और द्वितीय चरण में 10 मार्च को चुनाव होगा, जबकि 12 मार्च को विशेष सम्मिलन आयोजित किया जाएगा। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाए।

अब देखना यह होगा कि इस नए निर्णय से जिले में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया कितनी प्रभावी और सफल रहती है तथा इसका जनता और राजनीतिक दलों पर क्या असर पड़ता है।