अजीम प्रेमजी फाउंडेशन टीम ने तोकापाल सीएचसी का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं का लिया जायजा

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन टीम ने तोकापाल सीएचसी का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं का लिया जायजा

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जगदलपुर, 18 मार्च 2025: बस्तर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत का आकलन करने के उद्देश्य से अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की टीम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) तोकापाल का दौरा किया। इस टीम का नेतृत्व डॉ. गुरुराज पाटिल एवं डॉ. संध्या कर रहे थे। उनके साथ सहयोगी संस्था लेप्रा सोसाइटी की टीम भी मौजूद रही। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को परखना, पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती बच्चों की स्थिति जानना और कुष्ठ रोग उपचार केंद्र सहित अन्य महत्वपूर्ण विभागों की वास्तविक स्थिति का अवलोकन करना था।

स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का व्यापक निरीक्षण

टीम ने सबसे पहले पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) का दौरा किया, जहाँ गंभीर कुपोषण से ग्रसित बच्चों का इलाज किया जाता है। इस दौरान टीम ने बच्चों के स्वास्थ्य की स्थिति, पोषण आहार की गुणवत्ता और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की जांच की। डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों से बातचीत कर उन्होंने जाना कि पोषण पुनर्वास कार्यक्रम कितना प्रभावी है और इसमें और क्या सुधार किए जा सकते हैं।

इसके बाद टीम ने कुष्ठ वार्ड का निरीक्षण किया, जहाँ कुष्ठ रोग से पीड़ित मरीजों का इलाज किया जाता है। टीम ने वहाँ भर्ती मरीजों की स्थिति जानी और उपचार की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने ग्रेड-02 विकृति और एमसीआर चप्पलों के वितरण से जुड़ी जानकारी भी हासिल की।

टीबी और अन्य रोगों की जांच प्रक्रिया का मूल्यांकन

निरीक्षण के दौरान टीम ने ट्रूनॉट लैब का भी जायजा लिया, जहाँ टीबी की जांच की जाती है। टीम ने लैब में उपलब्ध उपकरणों, टेस्टिंग प्रक्रिया और रजिस्टरों की जांच की। उन्होंने यह भी देखा कि मरीजों के लिए एक्स-रे सुविधा कितनी प्रभावी है और क्या इसमें कोई सुधार की आवश्यकता है।

इसके अलावा, टीम ने अन्य वार्डों और ओपीडी सेक्शन का भी दौरा किया और मरीजों से उनकी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर फीडबैक लिया। स्वास्थ्य कर्मियों से भी चर्चा की गई ताकि यह समझा जा सके कि उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर सुझाव

निरीक्षण के दौरान अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की टीम ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सुझाव दिए, जिनमें निम्नलिखित शामिल थे:

कुपोषण की समस्या पर विशेष ध्यान – पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों को बेहतर आहार और अधिक मेडिकल सहायता देने की जरूरत बताई गई।

टीबी और अन्य संक्रामक बीमारियों की प्रभावी जांच – ट्रूनॉट लैब में अधिक संसाधन जोड़ने और जांच प्रक्रिया को तेज करने का सुझाव दिया गया।

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मरीजों के लिए बेहतर सुविधा – अस्पताल में मरीजों के लिए बेड, दवाइयों की उपलब्धता और अन्य संसाधनों को और अधिक सुदृढ़ करने पर बल दिया गया।

स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या बढ़ाने की जरूरत – सीएचसी में डॉक्टरों और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या में वृद्धि करने की आवश्यकता जताई गई।

स्वच्छता और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार – अस्पताल परिसर की स्वच्छता, टॉयलेट सुविधाओं और पेयजल उपलब्धता को लेकर सुधार की आवश्यकता महसूस की गई।

तोकापाल सीएचसी के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. ऋषभ साव ने इस निरीक्षण को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की टीम द्वारा दिए गए सुझावों को गंभीरता से लिया जाएगा और आवश्यक सुधार किए जाएंगे। अन्य अधिकारियों, जैसे एनएमए शिव नारायण पांडे, एसटीएस प्रदीप त्रिपाठी और व्हीबीडी सुपरवाइजर सुदर्शन कश्यप ने भी इस निरीक्षण को स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन के लिए उपयोगी बताया।

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन और लेप्रा सोसाइटी की टीम केवल तोकापाल तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे 18 से 20 मार्च 2025 तक बस्तर के अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और संस्थानों का भी निरीक्षण करेंगी। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य बस्तर जिले की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था का मूल्यांकन कर आवश्यक सुधारों की अनुशंसा करना है।

बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियाँ कई गुना अधिक होती हैं। दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, डॉक्टरों की अनुपलब्धता, पोषण संबंधी समस्याएँ और संक्रामक बीमारियों की उच्च दर जैसी कई समस्याएँ देखी जाती हैं। ऐसे में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन का यह निरीक्षण बस्तर की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

निरीक्षण के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि बस्तर में स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है। विशेष रूप से कुपोषण, कुष्ठ और टीबी जैसी बीमारियों के उपचार में सुधार की जरूरत महसूस की गई। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की टीम ने यह भी सुझाव दिया कि स्वास्थ्य केंद्रों में जागरूकता अभियान चलाए जाएँ, जिससे अधिक से अधिक लोग अपनी सेहत को लेकर सचेत हों और समय पर इलाज प्राप्त कर सकें।

बस्तर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग यदि इन सुझावों पर अमल करता है, तो निश्चित रूप से आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन और अन्य सहयोगी संस्थाओं की इस पहल को एक सकारात्मक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जो बस्तर के स्वास्थ्य मानकों को ऊँचा उठाने में सहायक होगा।