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JeM की नई महिला ब्रिगेड “Jamaat al-Mu’minat”: खुफिया इनपुट में पाकिस्तान कनेक्शन — क्या बदली रणनीति बड़ी चुनौती बनेगी?

JeM की नई महिला ब्रिगेड “Jamaat al-Mu’minat”: खुफिया इनपुट में पाकिस्तान कनेक्शन — क्या बदली रणनीति बड़ी चुनौती बनेगी?

खुफिया एजेंसियों के इनपुट के मुताबिक जैश-ए-मोहम्मद ने ‘Jamaat al-Mu’minat’ नाम से महिला ब्रिगेड बनाई है; ऑनलाइन रिक्रूटमेंट, मदरसों और व्हाट्सऐप समूहों के जरिए भर्ती और प्रोपगैंडा चल रहा है। रिपोर्ट्स में ऑपरेशन सिंदूर/पहलगाम घटनाक्रम का संदर्भ और पाकिस्तान से लिंक का जिक्र है।

नई दिल्ली / श्रीनगर. — भारतीय खुफिया एजेंसियों को मिले ताज़ा इनपुट से यह साफ़ हुआ है कि जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसी आतंकी संस्थाएँ अपनी कार्य-शैली बदल रही हैं और अब महिलाओं को अपने नेटवर्क में जोड़ने का प्रयास तेज कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह महिला विंग ‘Jamaat al-Mu’minat / जमात-उल-मुमिनात’ नाम से सक्रिय की जा रही है और इसकी शुरुआत 8 अक्टूबर 2025 जैसे तिथियों से कुछ मार्काज़-स्तर के मीटिंग्स/रिलीज़ के संकेतों के साथ हुई बताई जा रही है। The Times of India+1

कहाँ और कैसे सक्रिय है:
खुफियाँ बताती हैं कि समूह जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रीय हिस्सों में ऑनलाइन नेटवर्क, सोशल-मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सऐप ग्रुप और स्थानीय मदरसों की कारीगर-रोल वाली सुविधाओं का इस्तेमाल कर महिलाओं को प्रभावित कर रहा है। ये नेटवर्क सेल-आधारित (छोटे समूह) संरचना पर काम कर रहे हैं — भर्ती, फंडरेज़िंग और संदेश प्रसारण के लिए स्वतंत्र सेल्स।

पाकिस्तान कनेक्शन और ऑपरेशन-संदर्भ:
खुफिया बिंदुओं में पाकिस्तान से संबंधों के ठोस संकेत मिल रहे हैं। रिपोर्ट्स में 13 रबी-उल-थानी (8 अक्टूबर 2025) को आयोजित मार्काज़-स्तरीय बैठकों का जिक्र और पाकिस्तान के कुछ केन्द्रों से जुड़ी गतिविधियों का हवाला दिया गया है। इस पृष्ठभूमि को समझने के लिए यह भी ध्यान देने योग्य है कि भारतीय सुरक्षा बलों की ऑपरेशन-सिंदूर/पहलगाम के खिलाफ जवाबी कार्रवाइयों के बाद ही इन नेटवर्क रणनीतियों में बदलाव के संकेत तेज हुए हैं — जिसके बारे में मीडिया और सरकारी बयानों में भी चर्चा रही है।

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रणनीति में बदलाव — क्या नया है?
परंपरागत तौर-तरीके से अलग, जिन कट्टरपंथी समूहों (ISIS/बोको हराम/हमास जैसी प्रणालियाँ) ने पहले महिलाओं को सक्रिय भूमिका दी, उसी तरह अब JeM जैसी संस्थाएँ भी महिलाओं के ज़रिये भर्ती व घटनाओं के लिए रास्ता खोलने की योजना बना रही हैं — हालाँकि JeM पहले इस दिशा में हतोत्साहित रहती थी। सूत्रों का कहना है कि संगठन ने महिला विंग के ज़रिये प्रोपेगैंडा, नेटवर्किंग और भविष्य में संभावित ‘ऑपरेशनल’ उपयोग के इरादे जताए हैं। मीडिया रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि इस ब्रिगेड के नेतृत्व के लिए Masood Azhar के परिवार/संबंधित लोगों के नाम जुड़े बताए जा रहे हैं।

जो जोखिम बनकर उभर रहे हैं:

  1. महिलाओं के माध्यम से किसी समाज के भीतर ब्रेनवॉश व लोकल-लैंगिक नेटवर्किंग से सुरक्षा एजेंसियों के लिए पहचान करना मुश्किल होगा।

  2. सेल-आधारित व डीसेंट्रलाइज़्ड दिशा से अनौपचारिक फंडिंग और संदेश तेजी से फैल सकते हैं।

  3. अगर महिलाओं को ऑपरेशनल भूमिका दी जाने लगी तो अघोषित/छिपे हुए तरीकों से हमला-प्रणालियाँ और भी जटिल हो सकती हैं — इसलिए इंटेलिजेंस-नेटवर्क की टार्गेटिंग बदलनी होगी।

क्या कहा जा रहा है मीडिया और ऑफिशियल चैनलों में:
राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों और वीडियो/रिपोर्टिंग में इस नए महिला-ब्रिगेड के गठन का हवाला और ऑपरेशन-सिंडूर के बाद JeM पर बढ़ती दबाव-स्थिति का संबंध जोड़ा गया है। ख़ासकर कुछ हाई-प्रोफाइल स्ट्राइक और लक्षित ऑपरेशन के बाद JeM के ढाँचे में बदलाव के संकेत मीडिया में सामने आए हैं। इन रिपोर्टों में स्थानीय भर्ती-कोशिशों तथा पाकिस्तान-आधारित कुछ मार्काज़ के ज़िक्र के साथ-साथ वीडियो/ओपन-सोर्स दावों का संदर्भ भी है।

क्या करना चाहिए — सुरक्षा/पॉलिसी सुझाव (प्राइमरी-लेवल)

  • स्थानीय-स्तर पर महिलाओं/मदरसा-नेटवर्क पर सायबर-इंटेलिजेंस और सामुदायिक-सेंटीनेंस को बढ़ाएं।

  • व्हाट्सऐप/सोशल मीडिया समूहों की मॉनिटरिंग के लिए तकनीकी-इन्फ्रास्ट्रक्चर और कानूनी प्रक्रिया तैयार रखें।

  • मदरसों/स्थानीय शैक्षिक संस्थाओं में रेड-फ्लैग ट्रेनिंग और कम्युनिटी-आउटरिच प्रोग्राम्स लागू करें ताकि संवेदनशीलता व वैकल्पिक रास्ते मौजूद हों।

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