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PM-KUSUM योजना: छत्तीसगढ़, MP और UP में सौर ऊर्जा से खेती की तस्वीर बदल रही है

PM-KUSUM योजना के तहत छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में सोलर पंप और विकेंद्रीकृत ऊर्जा से किसानों को सस्ती बिजली, सिंचाई सुविधा और अतिरिक्त आय मिल रही है। पढ़ें 1000 शब्दों का विशेष विश्लेषण।

PM-KUSUM योजना: छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा से बदलती खेती की तस्वीर

नई दिल्ली।भारत में खेती और ऊर्जा का रिश्ता जितना गहरा है, उतनी ही बड़ी चुनौती भी है—खासकर ग्रामीण इलाकों में। अनियमित बिजली आपूर्ति, डीज़ल पर निर्भरता और बढ़ती लागत लंबे समय से किसानों की परेशानी रही है। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) की शुरुआत की। आज यह योजना विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा प्रणाली के जरिए देश के कई राज्यों में खेती की तस्वीर बदल रही है—खासतौर पर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्यों में।

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PM-KUSUM: योजना का मूल उद्देश्य

नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा संचालित PM-KUSUM योजना का उद्देश्य किसानों को सस्ती, स्वच्छ और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना है। इसके तहत खेतों के पास ही सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे:

  • ट्रांसमिशन लॉस कम हो
  • स्थानीय स्तर पर बिजली की उपलब्धता बढ़े
  • किसान डीज़ल खर्च से मुक्त हों

यह योजना खेती को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।


छत्तीसगढ़: आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा का नया सहारा

छत्तीसगढ़ में बड़ी आबादी आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों में निवास करती है, जहाँ बिजली आपूर्ति अब भी एक चुनौती रही है। PM-KUSUM योजना यहाँ किसानों के लिए जीवनरेखा बनकर उभर रही है।

सौर पंपों की स्थापना से:

  • दूरस्थ इलाकों में सिंचाई संभव हुई
  • डीज़ल पर निर्भरता घटी
  • धान, सब्ज़ी और दलहन की खेती को मजबूती मिली

राज्य के कई जिलों में किसान अब दिन के समय सौर ऊर्जा से सिंचाई कर पा रहे हैं, जिससे उत्पादन लागत में कमी और फसल की गुणवत्ता में सुधार देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि PM-KUSUM छत्तीसगढ़ में कृषि और ग्रामीण आजीविका को स्थायी आधार दे सकती है।


मध्य प्रदेश: सौर ऊर्जा से खेती और आय—दोनों में बढ़त

मध्य प्रदेश देश के अग्रणी कृषि राज्यों में शामिल है। यहाँ बड़े पैमाने पर सिंचाई की जरूरत होती है, जिसके लिए बिजली और डीज़ल पर भारी खर्च आता था। PM-KUSUM योजना ने इस परिदृश्य को बदलना शुरू किया है।

मध्य प्रदेश में:

  • खेतों के पास सौर संयंत्र लगाए जा रहे हैं
  • किसान अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर आय अर्जित कर रहे हैं
  • ग्रामीण बिजली ढांचे पर दबाव कम हुआ है

विशेषज्ञों के अनुसार, यह योजना राज्य में ऊर्जा उत्पादक किसान की अवधारणा को मजबूती दे रही है। कई किसान अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा भागीदार बन चुके हैं।

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उत्तर प्रदेश: बड़े राज्य में बड़ी ऊर्जा चुनौती का समाधान

उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और जनसंख्या वाले राज्य में बिजली और कृषि दोनों बड़ी चुनौतियाँ रही हैं। PM-KUSUM योजना यहाँ स्थानीय ऊर्जा समाधान के रूप में सामने आई है।

राज्य में:

  • छोटे और सीमांत किसानों को सौर पंपों से राहत
  • बिजली कटौती की समस्या से निजात
  • सिंचाई समय पर होने से फसल उत्पादकता में सुधार

ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित विकेंद्रीकृत प्रणाली से बिजली की उपलब्धता बेहतर हुई है, जिससे खेती के साथ-साथ डेयरी और अन्य सहायक गतिविधियाँ भी लाभान्वित हो रही हैं।


विकेंद्रीकृत ऊर्जा प्रणाली: तीनों राज्यों की साझा ताकत

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश—तीनों में PM-KUSUM की सफलता का मूल कारण है विकेंद्रीकृत ऊर्जा मॉडल। इससे:

  • स्थानीय मांग और आपूर्ति में संतुलन
  • ग्रिड पर निर्भरता कम
  • ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता

यह मॉडल आने वाले समय में ग्रामीण उद्योगों और एग्री-प्रोसेसिंग को भी बढ़ावा दे सकता है।


पर्यावरण संरक्षण और जलवायु लाभ

PM-KUSUM योजना का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। सौर ऊर्जा के उपयोग से:

  • कार्बन उत्सर्जन में कमी
  • डीज़ल प्रदूषण से राहत
  • जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद

तीनों राज्यों में यह योजना ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन का अहम हिस्सा बन रही है।


चुनौतियाँ और ज़मीनी सच्चाई

हालाँकि योजना के लाभ स्पष्ट हैं, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भी मौजूद हैं:

  • शुरुआती निवेश की प्रक्रिया
  • तकनीकी प्रशिक्षण की आवश्यकता
  • कुछ क्षेत्रों में धीमा क्रियान्वयन

सरकार और राज्य एजेंसियाँ इन बाधाओं को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान और प्रक्रियागत सुधार कर रही हैं।


भविष्य की तस्वीर

ऊर्जा और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि PM-KUSUM को और तेज़ी से लागू किया गया, तो:

  • किसानों की आय में स्थायी वृद्धि
  • ग्रामीण-शहरी ऊर्जा असमानता में कमी
  • भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को मजबूती

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह योजना ग्रामीण विकास का इंजन बन सकती है।

PM-KUSUM योजना आज केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के ऊर्जा-संचालित भविष्य की कहानी है।
छत्तीसगढ़ के वनांचल, मध्य प्रदेश के खेत और उत्तर प्रदेश के गांव—हर जगह सूरज की रोशनी से बिजली बनना इस बात का संकेत है कि खेती, ऊर्जा और पर्यावरण एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

यह योजना किसानों को केवल बिजली नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और स्थिर भविष्य की दिशा भी दिखा रही है।

Ashish Sinha

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