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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, परमाणु ऊर्जा विभाग महामारी से लड़़ने में देश के कोविड बुनियादी ढांचे में सहायता कर रहा है

केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डोनर) राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन,परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि भाभा परमाणु केंद्र और परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) कोविड संबंधित उपकरणों तथा टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराने के जरिये महामारी से लड़़ने में देश की सहायता कर रहे हैं। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक ऑॅनलाइन समीक्षा बैठक में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कोविड-19 के दौरान जन कल्याण के लिए की गई पहलों की सराहना की।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कोबाल्ट सोर्स का उपयोग करने के जरिये पीपीई किट्स के स्टरलाइजेशन के लिए किए गए प्रोटोकॉल के विकास में पीपीई किट्स के पुर्नउपयोग की संभावना है। इसी प्रकार, एचईपीए फिल्टर टेक्नोलॉजी के उपयोग के जरिये एन-99 मास्क का विकास किया गया है। उन्होंने ने कहा कि यह मास्क एन-95 मास्क से बेहतर है और एन-99 मास्क पहले ही तीन स्वतंत्र प्रयोगशालाओं द्वारा प्रमाणित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस टेक्नोलॉजी को व्यापक स्तर पर उत्पादन के लिए ट्रांसफर किया गया है क्योंकि यह टिकाऊ तथा एन-95 मास्क की तुलना में सस्ता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि परमाणु ऊर्जा विभाग ने पावर्ड रेस्पिरेटर्स, रीफर, पोर्टेबल प्लाज्मा स्टरलाइजेशन तथा मेडिकल अपशिष्टों के लिए प्लाज्मा इनसिनेरेशन टेक्नोलॉजी के अतिरिक्त, आरटी-पीसीआर टेस्टिंग के लिए सफलतापूर्वक रिएजेंट्स को भी डेवेलप किया है।

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डॉ. जितेंद्र सिंह को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई कि टाटा मेमोरियल के सभी अस्पतालों में कोविड से संक्रमित रोगियों के लिए 25 प्रतिशत बेड जो लगभग 600 हैं,आरक्षित कर दिये गये है। 6 एलपीएम के लगभग 5,000ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स विदेशों से दान के रूप में टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) द्वारा प्राप्त किए जा रहे हैं और इनमें से अधिकांश देश के अन्य कैंसर अस्पतालों में दे दिए जाएंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि कोविड-19 की गंभीरता के लिए आनुवंशिक संवेदनशीलता निर्धारित करने के लिए वर्तमान में टाटा मेमोरियल अस्पताल के सहयोग से‘कोविड-19 के लिए निगरानी जांच‘ अध्ययन किया जा रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे अनूठा और दुनिया में हो रहे दुर्लभतम अध्ययनों में से एक बताया जिसके परिणाम बहुत जल्द वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के साथ साझा किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, एक अध्ययन उन मौखिक संकेतों का पता लगाने के लिए भी किया जा रहा है जो कोविड-19 की गंभीरता का अनुमान लगा सकते हैं।

 

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले वर्ष जून में कोविड बीप लांच करने का स्मरण करते हुए कहा कि आईआईटी हैदराबाद तथा ईसीआईसी मेडिकल कॉलेज हैदराबाद के सहयोग से डीएई द्वारा विकसित सिस्टम कोविड-19 मरीजों के लिए भारत की पहली स्वदेशी, किफायती, वायरलेस फिजियोलॉजिकल पैरामीटर्स मोनिटरिंग सिस्टम है। उन्होंने कहा कि कोविड बीप इसका बिल्कुल सटीक उदाहरण है कि किस प्रकार भारत के विख्यात संस्थानों के बीच समन्वय न्यूनतम लागत के साथ देश के सामने आने वाली अधिकांश चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर सकता है और देश को वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बना सकता है।

डीएई सचिव के एन व्यास, न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशनऑॅफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के सीमएडी श्री एस के शर्मा, बीएआरसी के निदेशक डॉ. ए के मोहंती तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने समीक्षा बैठक में भाग लिया।

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