
अयोध्या में रामलला का भव्य श्रृंगार और चार समय भोग, जानें पूरा पूजन क्रम
अयोध्या श्री राम जन्मभूमि मंदिर में मार्गशीर्ष एकादशी पर रामलला का दिव्य श्रृंगार किया गया। प्रतिदिन चार समय भोग, सुबह 6.30 बजे प्रथम आरती और रात 8.30 बजे शयन आरती होती है। मौसम के अनुसार वस्त्र बदलते हैं और विशेष व्यंजन मंदिर रसोई में तैयार किए जाते हैं।
अयोध्या में रामलला का भव्य अलौकिक श्रृंगार, चार समय भोग और विशेष आरती व्यवस्था
अयोध्या/01 दिसंबर 2025। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या धाम में मार्गशीर्ष माह शुक्ल पक्ष की एकादशी, विक्रम संवत 2082 के अवसर पर ब्रह्मांड नायक प्रभु श्री रामलला का अलौकिक भव्य श्रृंगार संपन्न हुआ। प्रतिदिन की तरह आज भी रामलला को चार समय भोग लगाया गया और विशेष पूजा-अर्चना की गई।
रामलला को मौसम और समय के अनुसार रोज अलग-अलग व्यंजन परोसे जाते हैं, जो राम मंदिर की विशेष रसोई में तैयार होते हैं। दिन की शुरुआत ‘बाल भोग’ से होती है। रामलला को ऋतु के अनुसार वस्त्र पहनाए जाते हैं—गर्मी में हल्के सूती वस्त्र और शीतकाल में ऊनी पोशाक व स्वेटर धारण कराए जाते हैं।
सुबह 6.30 बजे प्रथम आरती के साथ रामलला का जागरण होता है। इसके बाद लेप, स्नान और श्रृंगार कर उनकी दिव्य आराधना की जाती है। दोपहर 12 बजे भोग आरती, शाम 7.30 बजे संध्या आरती और रात 8.30 बजे शयन आरती की व्यवस्था है।
भक्तों को रामलला के दर्शन रात 7.30 बजे तक उपलब्ध रहते हैं। रामलला का श्रृंगार प्रतिदिन परिवर्तित होता है और फूलों की विशेष माला दिल्ली से मंगाई जाती है।








