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संस्कृत और मैथिली में भी पढ़ सकेंगे संविधान, राष्ट्रपति ने जारी की प्रतियां, एक मंच पर आए मोदी-राहुल

संस्कृत और मैथिली में भी पढ़ सकेंगे संविधान, राष्ट्रपति ने जारी की प्रतियां, एक मंच पर आए मोदी-राहुल

संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान पारित किया था। सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय ने 19 नवंबर 2015 को एक अधिसूचना में 26 नवंबर को हर साल ‘संविधान दिवस’ के तौर पर मनाने की बात कही थी।

नई दिल्ली। भारत के संविधान को अंगीकार किए जाने का यह 75वां वर्ष है। मंगलवार को संविधान को अपनाने के 75 वर्ष पूरे हुए हैं। इस अवसर पर संविधान दिवस का एक विशेष कार्यक्रम संविधान सदन (पुराने संसद भवन) के सेंट्रल हॉल में आयोजित किया गया। यहां राष्ट्रपति ने संस्कृत और मैथिली में संविधान की प्रतियां जारी की।

संविधान दिवस की 75वीं वर्षगांठ पर 75 रुपये का एक विशेष सिक्का जारी किया। इस दौरान एक डाक टिकट भी जारी किया गया। यह डाक टिकट संविधान की उन मूल भावनाओं का प्रतीक है जो भारत को एकजुट करती है और हमें आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती है। साथ ही 2 किताबों ‘भारतीय संविधान का निर्माण: एक झलक’ और ‘भारतीय संविधान का निर्माण और इसकी गौरवशाली यात्रा’ का विमोचन किया गया।

आयोजन में पहली बार PM नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक साथ एक ही मंच पर बैठे नजर आए। इनके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्‌डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर हरिवंश भी थे।

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इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि संविधान हमारे देश का सबसे पवित्र ग्रंथ है। आज हम सब इस ऐतिहासिक अवसर के भागीदार बने हैं और साक्षी भी बने हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि 75 वर्ष पहले संविधान सदन के इसी केंद्रीय कक्ष में आज ही के दिन संविधान सभा ने नव स्वाधीन देश के लिए संविधान निर्माण का बहुत बड़ा कार्य संपन्न किया था। राष्ट्रपति ने कहा कि उस दिन संविधान सभा के माध्यम से हम भारत के लोगों ने अपने इस संविधान को अपनाया था। हमारा संविधान हमारे व्यक्तिगत और सामूहिक स्वाभिमान को सुनिश्चित करता है।

इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि इन 5 वर्षों में हमारी हमारी संसद के माध्यम से आम जनता के जीवन में सामाजिक आर्थिक परिवर्तन लाए गए हैं। संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमारे घनिष्ठ प्रतिबद्धता है।

बता दें कि संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान पारित किया था। सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय ने 19 नवंबर 2015 को एक अधिसूचना में 26 नवंबर को हर साल ‘संविधान दिवस’ के तौर पर मनाने की बात कही थी। संविधान सभा ने 2 साल 11 महीने और 17 दिन की कड़ी मेहनत के बाद संविधान को तैयार किया था। संविधान की मूल अंग्रेजी कॉपी में 1 लाख 17 हजार 369 शब्द हैं।

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