दुबई की अनजान पिच पर खुद को ढालना न्यूजीलैंड के लिए बड़ी चुनौती: रचिन रवींद्र

दुबई की अनजान पिच पर खुद को ढालना न्यूजीलैंड के लिए बड़ी चुनौती: रचिन रवींद्र

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लाहौर: न्यूजीलैंड के आक्रामक सलामी बल्लेबाज रचिन रवींद्र का मानना है कि रविवार को भारत के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में दुबई की “अनजान” पिच पर सफल होने के लिए परिस्थितियों के अनुकूल खुद को ढालना बेहद जरूरी होगा।

न्यूजीलैंड ने टूर्नामेंट में अपने लगभग सभी मैच पाकिस्तान में खेले हैं, जबकि भारत ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान अपने सभी मुकाबले दुबई में खेले हैं। इस कारण भारतीय टीम को वहां की परिस्थितियों का अच्छा अनुभव है, जबकि न्यूजीलैंड के लिए यह एक नई चुनौती साबित हो सकती है। दुबई की पिचें आम तौर पर स्पिनरों की मददगार मानी जाती हैं और यहां बल्लेबाजी करना उतना आसान नहीं होता जितना कि पाकिस्तान की पिचों पर।

रचिन रवींद्र ने प्रेस वार्ता में कहा, “हमने इस टूर्नामेंट में अब तक पाकिस्तान में खेला है, लेकिन फाइनल दुबई में होगा, जो हमारे लिए एक नई परीक्षा होगी। हमें जल्द से जल्द परिस्थितियों को समझकर खुद को ढालना होगा। भारत को यहां खेलने का अधिक अनुभव है, लेकिन हम भी अपने खेल में सुधार कर सकते हैं।”

भारत की टीम दुबई की परिस्थितियों में ढल चुकी है और उनके पास अनुभवी स्पिन गेंदबाज हैं, जो इन परिस्थितियों में कारगर साबित हो सकते हैं। दूसरी ओर, न्यूजीलैंड को तेज गेंदबाजी में बढ़त हासिल है, लेकिन स्पिन विभाग में उन्हें चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

न्यूजीलैंड के कोच गैरी स्टीड ने कहा, “हमारे लिए यह जरूरी है कि हम जल्दी से पिच का मिजाज समझें और उसी के अनुसार रणनीति बनाएं। हमें अपने तेज गेंदबाजों और स्पिनरों के सही संयोजन के साथ मैदान में उतरना होगा।”

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दुबई की पिचों पर आमतौर पर स्पिनरों का दबदबा रहता है। रविचंद्रन अश्विन और कुलदीप यादव जैसे भारतीय स्पिनर पहले भी यहां बेहतरीन प्रदर्शन कर चुके हैं। न्यूजीलैंड के पास मिशेल सैंटनर और ईश सोढ़ी जैसे अच्छे स्पिनर हैं, लेकिन उनकी परख अभी बाकी है।

अगर पिच से स्पिनरों को मदद मिली, तो भारत को फायदा मिलेगा। लेकिन अगर पिच पर उछाल रहा, तो ट्रेंट बोल्ट और टिम साउदी जैसे कीवी गेंदबाज भारत को परेशानी में डाल सकते हैं।

दुबई में भारतीय बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया है। रोहित शर्मा, विराट कोहली और शुभमन गिल अच्छी फॉर्म में हैं। सूर्यकुमार यादव की विस्फोटक बल्लेबाजी भी टीम के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। हालांकि, अगर न्यूजीलैंड के गेंदबाज शुरुआती झटके देने में सफल रहे, तो भारतीय मध्यक्रम पर दबाव आ सकता है।

न्यूजीलैंड की बल्लेबाजी की बात करें तो डेवोन कॉनवे, रचिन रवींद्र और केन विलियमसन की भूमिका अहम होगी। ये तीनों बल्लेबाज बड़े मैचों में अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। ग्लेन फिलिप्स और जिमी नीशम जैसे आक्रामक बल्लेबाज भी भारत के लिए खतरा बन सकते हैं।

फाइनल के लिए दोनों टीमों की संभावित प्लेइंग इलेवन

भारत: रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, केएल राहुल (विकेटकीपर), हार्दिक पांड्या, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह, रविचंद्रन अश्विन।

न्यूजीलैंड: डेवोन कॉनवे, फिन एलन, केन विलियमसन (कप्तान), रचिन रवींद्र, ग्लेन फिलिप्स, जिमी नीशम, मिशेल सैंटनर, टिम साउदी, ईश सोढ़ी, ट्रेंट बोल्ट, लॉकी फर्ग्यूसन।

दुबई की अनजान पिच पर न्यूजीलैंड को चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। भारत को वहां खेलने का अनुभव है, लेकिन न्यूजीलैंड एक खतरनाक टीम है, जो किसी भी स्थिति में खुद को ढालने में सक्षम है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी टीम परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझती है और खिताब अपने नाम करती है।