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कोरबा: कलेक्टर ने पोड़ी उपरोड़ा के सरभोंका जलाशय में किया केज कल्चर का निरीक्षण

कोरबा: कलेक्टर ने पोड़ी उपरोड़ा के सरभोंका जलाशय में किया केज कल्चर का निरीक्षण

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जिले में मत्स्य उत्पादन और एक्वा टूरिज्म को बढ़ाने पर दिया जोर

कोरबा,20 मार्च 2025 – कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के अंतर्गत ग्राम सरभोंका के निमऊ कछार में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कलेक्टर अजीत वसंत ने यहां प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के सहयोग से संचालित केज कल्चर मत्स्य पालन परियोजना का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्थानीय मछुवारा समिति के सदस्यों से बातचीत कर उनकी आमदनी, जीवन स्तर में आए बदलाव और मत्स्य पालन के विस्तार को लेकर जानकारी ली। कलेक्टर ने मत्स्य अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देते हुए जिले में मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने के साथ-साथ एक्वा टूरिज्म को विकसित करने की बात कही।

केज कल्चर से ग्रामीणों को आर्थिक संबल
सरभोंका जलाशय में 800 केज लगाए गए हैं, जिनमें 9 पंजीकृत मछुवारा समितियों के लगभग 160 सदस्यों को 5-5 केज प्रदान किए गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि केज कल्चर से उन्हें प्रतिवर्ष 80 से 90 हजार रुपये तक की आय होती है। इसके अलावा, मत्स्य परिवहन, बिक्री और जलाशय की साफ-सफाई से भी अतिरिक्त आमदनी हो रही है।

केज कल्चर के अंतर्गत, जलाशयों में तैरते हुए पिंजरों (केज) में मछलियों का पालन किया जाता है। यह तकनीक मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने में कारगर साबित हो रही है। स्थानीय मछुवारों को प्रशिक्षित कर उनकी दक्षता को भी विकसित किया जा रहा है, जिससे उत्पादन में वृद्धि हो रही है और निर्यात की संभावनाएँ भी बढ़ रही हैं।

मत्स्य पालन से जुड़ी सुविधाओं का होगा विस्तार
कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान मत्स्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि केज कल्चर को और अधिक विकसित किया जाए और इसके दायरे को बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय मछुवारों को और अधिक अवसर प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन हरसंभव सहयोग करेगा।

इसके अलावा, मत्स्य पालन से जुड़ी अन्य सुविधाओं जैसे लैंडिंग सेंटर, प्रोसेसिंग यूनिट, एक्वा पार्क और एक्वा टूरिज्म को भी बढ़ावा देने की बात कही गई। ये सभी सुविधाएँ मिलकर क्षेत्रीय मत्स्य उद्योग को एक नई ऊंचाई प्रदान कर सकती हैं।

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एक्वा टूरिज्म से रोजगार के नए अवसर
मत्स्य पालन के साथ-साथ एक्वा टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना पर भी चर्चा की गई। एक्वा टूरिज्म न केवल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सकता है, बल्कि इससे स्थानीय युवाओं को भी रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।

इस पहल के तहत, जलाशयों के किनारे रिसॉर्ट्स, बोटिंग और फिशिंग टूरिज्म को विकसित किया जा सकता है। इससे जिले के पर्यटन को भी गति मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

ग्रामीणों की समस्याओं पर भी हुई चर्चा
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली। मछुवारों ने मत्स्य पालन से जुड़ी कुछ समस्याओं जैसे – मछली चारे की उपलब्धता, बाजार तक पहुंच और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित मुद्दों को सामने रखा।

इसके जवाब में कलेक्टर ने कहा कि जिला प्रशासन इन सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करेगा और आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मछुवारों की सभी समस्याओं को प्राथमिकता से हल किया जाए और उन्हें सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिले।

अधिकारियों की उपस्थिति
निरीक्षण के दौरान पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के एसडीएम तुलाराम भारद्वाज और मत्स्य विभाग के अधिकारी क्रांति कुमार बघेल भी उपस्थित रहे। उन्होंने परियोजना की विस्तार से जानकारी दी और बताया कि केज कल्चर से जिले में मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

केज कल्चर मत्स्य पालन न केवल मछुवारों के जीवन स्तर को सुधारने में सहायक है, बल्कि यह जिले की अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रहा है। इस पहल से रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और एक्वा टूरिज्म के विकास की संभावनाएँ भी बढ़ रही हैं।

सरकार की इस योजना को सफल बनाने के लिए मछुवारों को जागरूक करना और उन्हें समय-समय पर प्रशिक्षण देना आवश्यक है। यदि यह योजना सही दिशा में आगे बढ़ती रही, तो यह कोरबा जिले को मत्स्य उत्पादन और पर्यटन के क्षेत्र में एक नया मुकाम दिला सकती है।

Ashish Sinha

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