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धान खरीदी 2025: टोकन संकट, गिरदावरी त्रुटि और कृषि अव्यवस्था पर कांग्रेस का हमला

15 दिन बाद भी किसानों को धान बेचने में भारी परेशानी — कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

रायपुर/30 नवंबर 2025। धान खरीदी शुरू हुए 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन खरीदी व्यवस्था अब भी सुचारू नहीं हो पाई है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने सरकार पर आरोप लगाया कि सोसायटियों में फैली अव्यवस्था, टोकन न कटना, और एग्रीस्टेक पोर्टल की गड़बड़ी के कारण किसान लगातार परेशान हो रहे हैं।

सोसायटियों में अव्यवस्था, किसानों को टोकन नहीं

सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि किसान रोज़ सोसायटी जाकर टोकन कटवाने की कोशिश करते हैं, लेकिन वहां

  • मशीनें बंद रहती हैं,
  • टोकन नहीं कटता,
  • और पंजीयन अपूर्ण होने का हवाला दिया जाता है।

उन्होंने आरोप लगाया—

“सरकार की नीयत साफ नहीं है। किसानों को समय पर टोकन भी नहीं मिल रहा और प्रति एकड़ 21 क्विंटल की खरीदी भी नहीं हो रही। अधिकांश सोसायटियों में सिर्फ 16 से 19 क्विंटल तक की खरीदी की जा रही है।”

एग्रीस्टेक पोर्टल में भारी गड़बड़ी

कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि एग्रीस्टेक पोर्टल में

  • 2023 के बाद खातों में परिवर्तन,
  • बंटवारा,
  • फौती का डाटा

अपडेट ही नहीं किया गया है।
इसके कारण हजारों किसान अब तक पंजीयन नहीं करा पाए हैं।

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उन्होंने बताया—

  • सोसायटी के कंप्यूटर में पूरा डेटा अपलोड नहीं है।
  • पोर्टल और सोसायटी के रिकॉर्ड में मिलान नहीं हो पा रहा।
  • जब किसानों को टोकन कटाने भेजा जाता है, उन्हें बताया जाता है कि डेटा अपूर्ण है।
  • जब डाटा अपडेट किया जाना था, उस समय कंप्यूटर ऑपरेटर हड़ताल पर थे।

“सरकार की लापरवाही की वजह से किसान भ्रमित और परेशान हैं। खरीदी व्यवस्था को तुरंत ठीक किया जाना चाहिए।”

गिरदावरी त्रुटियों से किसानों को बड़ा नुकसान

कांग्रेस ने कहा कि किसानों की जमीन का रकबा रिकॉर्ड में कम दिखाया जा रहा है, जिससे किसान अपना पूरा धान बेच नहीं पा रहे हैं। यह सीधे तौर पर किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा है।

सुशील आनंद शुक्ला ने कहा—

  • किसान तहसील, राजस्व कार्यालय से लेकर कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों तक शिकायत कर रहे हैं,
  • लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही है।

उन्होंने आरोप लगाया—

“यह त्रुटिपूर्ण गिरदावरी नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों से गंभीर खिलवाड़ है। प्रशासन की कार्यप्रणाली से साफ है कि सरकार 3100 रुपये प्रति क्विंटल पर किसानों का पूरा धान खरीदना ही नहीं चाहती।”


 

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