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अहिल्याबाई की मूर्ति तोड़ी, काशी से इंदौर तक उबाल:होलकर ट्रस्ट ने मोदी-योगी को लिखा- दोबारा प्रतिष्ठित कराएं, डीएम बोले- हम तो ठीक करा रहे इंदौर

प्रदेश खबर स्टेट हेड प्रवीण कुमार दुबे

 

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे प्रोजेक्ट के तहत अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा भी क्षतिग्रस्त हो गई।
उत्तरप्रदेश के वाराणसी में विश्वविख्यात मणिकर्णिका घाट के एक हिस्से को हाल ही में विकास कार्यों के नाम पर तोड़े जाने का मामला अब देशव्यापी विवाद का रूप ले चुका है। यह वही ऐतिहासिक घाट है, जिसका निर्माण वर्ष 1771 में मालवा की शासिका देवी अहिल्याबाई होलकर ने कराया था।

करीब ढाई सौ साल पुरानी इस विरासत को श्मशान घाट विकास परियोजना के तहत क्षतिग्रस्त किए जाने के आरोपों के बाद यूपी के काशी से लेकर एमपी के इंदौर तक लोगों की भावनाओं में उबाल है। एमपी में इंदौर ही नहीं बल्कि पूरे मालवा अंचल में नाराजगी और आक्रोश है।

मामला इसलिए भी संवेदनशील हो गया है, क्योंकि अहिल्याबाई होलकर न सिर्फ मालवा या महेश्वर की महारानी थीं, बल्कि उन्हें पूरे भारत में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में उनकी बनाई ऐतिहासिक संरचना को नुकसान पहुंचना सिर्फ एक निर्माण विवाद नहीं, बल्कि विरासत और आस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गया है।

पूरे मामले को सिलसिलेवार समझिए…

प्रोजेक्ट: 18 करोड़ का, लेकिन सवाल विरासत पर
प्रशासनिक रिकॉर्ड के मुताबिक मणिकर्णिका घाट क्षेत्र में करीब 18 करोड़ रुपए की लागत से श्मशान घाट विकास परियोजना प्रस्तावित है। इस परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2023 में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से सांसद होने के नाते प्रधानमंत्री का इस इलाके से सीधा जुड़ाव है।

प्रशासन का दावा है कि परियोजना के तहत लगभग 29,350 वर्ग मीटर क्षेत्र में निर्माण कार्य किया जा रहा है। गंगा तट की दलदली जमीन को देखते हुए 15 से 20 मीटर गहराई तक पाइलिंग कर सख्त मिट्टी तक फाउंडेशन तैयार किया गया, ताकि बाढ़ के दौरान किसी तरह का संरचनात्मक नुकसान न हो।

विरासत पर आंच से शुरू हुआ विवाद
घाट पर चल रहे प्रोजेक्ट में वह हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया, जिसे अहिल्याबाई होलकर की विरासत माना जाता है। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माण के दौरान घाट की पुरानी सीढ़ियां तोड़ दी गईं।

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इतना ही नहीं, देवी अहिल्याबाई से जुड़ी कई ऐतिहासिक मूर्तियां और धार्मिक प्रतीक भी क्षतिग्रस्त हो गए। कुछ मूर्तियां टूटकर मलबे में दब गईं, तो कुछ खुले में पड़ी मिलीं। एक शिवलिंग के क्षतिग्रस्त होने की बात भी सामने आई है।

जिस हिस्से को तोड़ा गया, वहां देवी अहिल्याबाई की शिव आराधना से जुड़ी प्रतिमाएं स्थापित थीं। आरोप है कि न तो इन्हें संरक्षित किया गया और न ही किसी ऐतिहासिक संस्था या ट्रस्ट से पूर्व अनुमति ली गई।

ये घाट के उस हिस्से की तस्वीर है, जिसे तोड़ा गया है। यहां मशीनें लगी हुई हैं।
खासगी ट्रस्ट का आरोप: बिना सूचना, कुछ घंटों में ध्वस्तीकरण
मणिकर्णिका घाट की देखरेख खासगी देवी अहिल्याबाई होलकर चैरिटीज ट्रस्ट करता है। ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंतराव होलकर ने इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है।

यशवंतराव होलकर ने जारी पत्र में कहा-

हमें अत्यंत दुख और निराशा के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि विकास के नाम पर वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट को अचानक ध्वस्त कर दिया गया। सन् 1791 में पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई होलकर ने इसका जीर्णोद्धार कराया था। यह स्थान अहिल्याबाई मां साहेब के लिए अत्यंत महत्व रखता था।

उन्होंने आरोप लगाया कि 10 जनवरी 2026 को बिना किसी पूर्व सूचना के, वाराणसी नगर निगम अधिकारियों के निर्देश पर कुछ ही घंटों में घाट का यह हिस्सा तोड़ दिया गया। यह पूरी कार्रवाई उस स्थान के इतिहास और सांस्कृतिक महत्व की पूरी तरह अनदेखी करते हुए की गई।

‘जिस देवी की प्रतिमा काशी में स्थापित की, वही मलबे में’
यशवंतराव होलकर ने पत्र में यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें भारत की संस्कृति की महान रक्षक के रूप में सम्मान दिया है। विडंबना देखिए कि उसी देवी अहिल्याबाई की पवित्र और ऐतिहासिक मूर्तियां आज मणिकर्णिका घाट के मलबे में दबी पड़ी हैं।

 

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