
ट्रेड डील पर भूपेश बघेल का बड़ा हमला: “अमेरिका को फायदा, भारत को नुकसान — ट्रंप किस राज से दे रहे हैं धमकी?”
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील, अमित शाह के बयान, नक्सलवाद, बस्तर विकास और आदिवासी नेताओं पर टिप्पणी को लेकर केंद्र व भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला।
ट्रेड डील से लेकर नक्सलवाद तक: भूपेश बघेल का केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेड डील अमेरिका के लिए फायदे का सौदा और भारत के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है।
भूपेश बघेल ने सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकी दे रहे हैं, ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर ट्रंप के पास प्रधानमंत्री मोदी के ऐसे कौन से राज हैं, जिनके आधार पर वे दबाव बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सामने आकर देश को यह बताना चाहिए कि वे राज क्या हैं। यदि कोई राज नहीं हैं, तो सरकार को ट्रंप को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए।
बस्तर विकास को लेकर भाजपा सरकार पर हमला
भूपेश बघेल ने बस्तर के विकास कार्यों को लेकर भी भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के दौरान बस्तर के अंदरूनी इलाकों में राशन दुकानें खोली गईं, राशन कार्ड और जॉब कार्ड बनाए गए, वन अधिकार पट्टे दिए गए, आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल और सड़कें बनाई गईं।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार अब तक केवल योजनाएं ही बना रही है, जमीनी स्तर पर काम दिखाई नहीं दे रहा।
नक्सलवाद पर अमित शाह के बयान को बताया अव्यवहारिक
नक्सलवाद के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि अमित शाह कई बार ऐसे दावे कर देते हैं, जो व्यवहारिक नहीं होते। उन्होंने कहा कि हम भी चाहते हैं कि नक्सलवाद खत्म हो, लेकिन झूठी घोषणाएं नहीं की जानी चाहिए।
कवासी लखमा को विधानसभा में मौका देने की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी जननेता कवासी लखमा एक चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं, उन्हें विधानसभा सत्र में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए।
हेमंत बिस्वा सरमा पर तीखी टिप्पणी
असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा पर निशाना साधते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि उन्हें मानसिक चिकित्सक से सहायता लेनी चाहिए, क्योंकि उनकी भाषा किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की नहीं हो सकती।










