
चैत्र नवरात्रि 2026: सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का महत्व, जानें तिथि, विधि और कथा
"चैत्र नवरात्रि 2026 के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व है। जानें सप्तमी तिथि, पूजा विधि, पौराणिक कथा और शनि दोष से राहत पाने के उपाय।"
चैत्र नवरात्रि 2026: सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व, जानें तिथि, विधि और कथा
अम्बिकापुर | 25 मार्च 2026
देशभर में चैत्र नवरात्रि की धूम जारी है और आज नवरात्रि का सातवां दिन यानी महासप्तमी मनाया जा रहा है। इस दिन मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां कालरात्रि की उपासना करने से जीवन के सभी भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों का अंत होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि देवी दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं और इन्हें संहार की देवी भी कहा जाता है। हालांकि उनका स्वरूप भले ही उग्र और भयानक दिखाई देता हो, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और कल्याणकारी मानी जाती हैं।
महासप्तमी की तिथि और शुभ योग
इस वर्ष सप्तमी तिथि 24 मार्च 2026 शाम 4:10 बजे से प्रारंभ होकर 25 मार्च 2026 दोपहर 1:52 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 25 मार्च को ही सप्तमी मनाई जा रही है।
इस बार सप्तमी मृगशिरा नक्षत्र और सौभाग्य योग में पड़ रही है, जो इसे और भी अधिक शुभ बनाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
मां कालरात्रि की पूजा का महत्व
मां कालरात्रि को अंधकार, भय और नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने वाली देवी माना जाता है। उनकी पूजा से साधक के जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से मां कालरात्रि की पूजा करता है, उसके जीवन से सभी प्रकार के संकट दूर हो जाते हैं। साथ ही शनि ग्रह के दुष्प्रभाव से भी राहत मिलती है।
कैसे करें मां कालरात्रि की पूजा
महासप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और मां कालरात्रि की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- दीपक जलाकर पूजा की शुरुआत करें
- धूप, फूल, अक्षत और चंदन अर्पित करें
- मां को लाल या नीले फूल चढ़ाएं
- गुड़, काले तिल और तेल का भोग लगाएं
- “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः” मंत्र का जाप करें
पूजा के अंत में आरती करें और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
मां कालरात्रि का स्वरूप
मां कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत उग्र और शक्तिशाली माना जाता है। उनका शरीर काले रंग का होता है, बाल खुले और बिखरे रहते हैं तथा उनके तीन नेत्र होते हैं जो तीनों लोकों को प्रकाशित करते हैं।
मां के चार हाथ होते हैं, जिनमें एक हाथ वरमुद्रा और दूसरा अभयमुद्रा में होता है। बाकी दो हाथों में हथियार होते हैं। उनका वाहन गधा माना जाता है।
हालांकि उनका स्वरूप डरावना प्रतीत होता है, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत शुभ फल देने वाली होती हैं, इसलिए उन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।
पौराणिक कथा: रक्तबीज का वध
पौराणिक कथा के अनुसार, रक्तबीज नामक राक्षस को ऐसा वरदान प्राप्त था कि उसकी एक बूंद रक्त गिरने पर एक नया राक्षस उत्पन्न हो जाता था। इस कारण उसका आतंक बढ़ता ही जा रहा था।
देवताओं की प्रार्थना पर मां पार्वती ने अपने तेज से मां कालरात्रि को उत्पन्न किया। मां कालरात्रि ने युद्ध के दौरान रक्तबीज के रक्त को धरती पर गिरने से पहले ही अपने मुख में समाहित कर लिया और अंततः उसका वध कर दिया।
इस प्रकार मां कालरात्रि ने संसार को एक बड़े संकट से मुक्त कराया।
शनि दोष से मुक्ति का विशेष दिन
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां कालरात्रि का संबंध शनि देव से माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव से राहत मिलती है।
जो लोग जीवन में लगातार बाधाओं का सामना कर रहे हैं, उन्हें इस दिन विशेष पूजा करनी चाहिए।
मां कालरात्रि को प्रिय भोग
मां कालरात्रि को प्रसन्न करने के लिए गुड़ का भोग लगाना विशेष शुभ माना जाता है। मान्यता है कि गुड़ अर्पित करने से देवी शीघ्र प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
पूजा के मंत्र
मुख्य मंत्र:
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः
स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आध्यात्मिक महत्व
मां कालरात्रि की पूजा केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह साधक के भीतर छिपे भय और नकारात्मकता को समाप्त कर उसे आत्मविश्वासी बनाती है।
इस दिन ध्यान और साधना करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और व्यक्ति अपने जीवन के लक्ष्य के प्रति अधिक केंद्रित हो पाता है।
चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन यानी महासप्तमी मां कालरात्रि की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन की गई पूजा न केवल भय और संकटों से मुक्ति दिलाती है, बल्कि जीवन में सफलता और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करती है।
भक्तों को चाहिए कि वे पूरे श्रद्धा और विश्वास के साथ मां कालरात्रि की पूजा करें और अपने जीवन को सुख-समृद्धि से भरें।












