
सरगुजा | बिहान योजना से बदली पुष्पा राजवाड़े की जिंदगी, बनीं लखपति दीदी
सरगुजा जिले की पुष्पा राजवाड़े ने बिहान योजना से जुड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की, ट्रैक्टर, मछली पालन व बागवानी से बनीं लखपति दीदी।
‘बिहान’ योजना से बदली जिंदगी: मेहनत और हौसले से लखपति दीदी बनीं पुष्पा राजवाड़े
अंबिकापुर, 21 फरवरी 2026/छत्तीसगढ़ शासन की ‘बिहान’ (राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में स्वावलंबन और समृद्धि का नया सवेरा लेकर आ रही है। इसका जीवंत उदाहरण सरगुजा जिले के ग्राम मेंड्रा खुर्द की निवासी पुष्पा राजवाड़े हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और समूह के सहयोग से आर्थिक तंगी को पीछे छोड़ते हुए आज सफल उद्यमी और ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बनाई है।
बिहान योजना से मिली नई पहचान
पुष्पा राजवाड़े बताती हैं कि पहले उनका जीवन केवल घरेलू कार्यों तक सीमित था। बदलाव की शुरुआत तब हुई जब वे ‘जय श्री शक्ति महिला स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ीं। समूह से जुड़कर उन्होंने बचत, वित्तीय अनुशासन और आर्थिक प्रबंधन की बारीकियां सीखीं। वर्तमान में वे समूह में लेखापाल की जिम्मेदारी निभा रही हैं और अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रही हैं।
कृषि यंत्रीकरण से बढ़ी आय
आगे बढ़ने के संकल्प के साथ पुष्पा ने समूह से ऋण लेकर ट्रैक्टर खरीदा, जिससे खेती के कार्य में क्रांतिकारी बदलाव आया। उन्होंने बताया कि पहले पारंपरिक साधनों से खेती करने में अत्यधिक मेहनत और समय लगता था, जबकि ट्रैक्टर से खेती तेज, आसान और समयबद्ध हो गई है।
इसके साथ ही वे ट्रैक्टर को किराए पर देकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रही हैं। इस कार्य में उनके पति भी सक्रिय सहयोग प्रदान करते हैं।
मछली पालन और बागवानी से बहुआयामी आजीविका
पुष्पा का समूह ‘मानसरोवर तालाब’ में मछली पालन एवं सामूहिक बागवानी का कार्य भी कर रहा है। इन विविध आजीविका गतिविधियों से समूह की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं और नियमित आय अर्जित कर रही हैं।
योजना ने बदली जीवन की दिशा
आज पुष्पा अपने दोनों बच्चों की बेहतर शिक्षा एवं पालन-पोषण सुनिश्चित कर पा रही हैं। वे गर्व से कहती हैं,
“आज मैं लखपति दीदी हूँ और इसका पूरा श्रेय बिहान योजना को जाता है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बिहान योजना ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का सुनहरा अवसर दिया है।
पुष्पा राजवाड़े की यह प्रेरक कहानी आज गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है और यह सिद्ध करती है कि सामूहिक प्रयास, आत्मविश्वास और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।











