
परीक्षा के दौरान जबरन वसूली और बिजली कटौती: बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ या प्रशासनिक अत्याचार?
परीक्षा के दौरान जबरन वसूली और बिजली कटौती: बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ या प्रशासनिक अत्याचार?
अंबिकापुर, सरगुजा: परीक्षा का समय किसी भी छात्र के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दौर होता है। यह वह समय होता है जब उन्हें मानसिक शांति और सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। लेकिन सरगुजा और अंबिकापुर में बिजली विभाग द्वारा बकाया वसूली के नाम पर जबरन बिजली कटौती की जा रही है, जिससे न केवल छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि उनके भविष्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
क्या परीक्षा के दौरान बिजली काटना न्यायसंगत है?
बिजली विभाग का दावा है कि बकाया राशि की वसूली जरूरी है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह वसूली परीक्षा के दौरान ही करनी थी?
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जब परीक्षा के बाद यह अभियान चलाया जा सकता था, तो इसे छात्रों की पढ़ाई के समय ही क्यों किया जा रहा है?
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क्या बिजली विभाग जानबूझकर इस समय गरीब और श्रमिक परिवारों पर दबाव बना रहा है?
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क्या यह नीति छात्रों को हतोत्साहित करने और शिक्षा में बाधा डालने के लिए बनाई गई है?
जबरन वसूली से छात्रों पर असर
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रात में पढ़ाई ठप – बिजली कटौती के कारण छात्र परीक्षा की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं।
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मानसिक तनाव – छात्रों को परीक्षा के साथ-साथ बिजली संकट की चिंता भी करनी पड़ रही है।
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गरीब छात्रों पर दोहरी मार – जो छात्र खुद मजदूरी कर पढ़ाई कर रहे हैं, वे बिजली का बढ़ा हुआ बिल भरने में असमर्थ हैं।
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ऑनलाइन पढ़ाई प्रभावित – कई छात्र इंटरनेट के जरिए पढ़ाई करते हैं, लेकिन बिजली कटने से वे इससे वंचित हो रहे हैं।
क्या बिजली विभाग गरीब छात्रों से बदला ले रहा है?
एक ओर सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा के दौरान इस तरह की जबरन वसूली गरीब परिवारों और छात्रों के साथ अन्याय है।
रवि वर्मा (12वीं कक्षा के छात्र) बताते हैं:
“हमारा घर किराए का है और बिजली का बिल मकान मालिक भरते हैं। लेकिन इस बार जबरदस्ती बिल बढ़ाकर वसूली की जा रही है, और अगर नहीं भरा तो लाइट काटने की धमकी दी जा रही है। मैं रात में पढ़ाई कैसे करूँ?”
एक अन्य छात्र, संजय, जो दिन में चाय दुकान पर काम करता है, कहता है:
“मैंने दिनभर काम किया, सोचा रात में पढ़ाई करूँगा, लेकिन बिजली विभाग ने कनेक्शन काट दिया। अगर गरीबों को पढ़ने से रोका जा रहा है, तो फिर सरकार शिक्षा की बातें क्यों करती है?”
शासन-प्रशासन की चुप्पी: मिलीभगत या लापरवाही?
इस मुद्दे पर प्रशासन और शासन पूरी तरह मौन है। जब हजारों छात्रों का भविष्य अंधेरे में जा रहा है, तो सरकार और अधिकारी खामोश तमाशा क्यों देख रहे हैं?
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क्या प्रशासन को गरीब छात्रों की कोई चिंता नहीं?
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क्या यह वसूली अभियान सिर्फ आम जनता के लिए है, जबकि VIP इलाकों की बिजली बिना रुके चल रही है?
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क्या सरकार परीक्षा के समय ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए बिजली विभाग को निर्देश नहीं दे सकती थी?
क्या यह सरकारी परीक्षा में फेल होने का संकेत है?
सरकार और प्रशासन की यह चुप्पी यह संकेत देती है कि या तो वे इसे मुद्दा मानते ही नहीं या फिर उनके पास इसे हल करने की कोई ठोस योजना नहीं है।
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जब मेहनतकश छात्र पढ़ाई नहीं कर पा रहे,
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जब गरीब परिवारों पर बिजली बिल के नाम पर अत्याचार हो रहा,
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जब छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं,
तो शासन और प्रशासन की चुप्पी अस्वीकार्य है। यह न सिर्फ असंवेदनशीलता है बल्कि एक तरह की शासकीय विफलता भी है।
समाधान क्या हो सकता है?
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परीक्षा के दौरान बिजली कटौती पर पूरी तरह रोक लगे।
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बिजली बिल वसूली अभियान को परीक्षा खत्म होने तक स्थगित किया जाए।
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छात्रों के लिए रात्रि अध्ययन केंद्रों में बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था हो।
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गरीब छात्रों को विशेष बिजली सब्सिडी मिले ताकि वे बिना बाधा पढ़ाई कर सकें।
शासन और प्रशासन को जवाब देना होगा!
अगर सरकार और प्रशासन ने इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया, तो यह न केवल छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय होगा, बल्कि जनता का सरकार से भरोसा भी खत्म करेगा।
अब सवाल यह है—
“क्या सरकार और बिजली विभाग इस मुद्दे पर संज्ञान लेकर कोई ठोस कार्रवाई करेंगे, या फिर यह चुप्पी उनकी विफलता को उजागर करेगी?”










